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दिल्ली एनसीआर में 10 साल पुराने डीजल वाहनों से बैन हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची केंद्र सरकार

नई दिल्ली : केन्द्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दस साल पुराने डीजल वाहनों पर लगा बैन हटाने के लिये याचिका दायर की| केन्द्र के मुताबिक़ इस बैन से समाज का कमजोर वर्ग आर्थिक दृष्टि से प्रभावित हो रहा है |
अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी से न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति पी सी पंत की पीठ ने जानना चाहा कि इस बैन के बारे में राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेश को चुनौती देने वाली ऐसी ही एक अन्य याचिका की क्या स्थिति है |  अटार्नी जनरल ने कहा, ‘वह याचिका शीर्ष अदालत ने खारिज कर दी थी।’ इस पर पीठ ने अटार्नी जनरल से जानना चाहा कि किस आधार पर वह याचिका खारिज की गयी थी और उस याचिका से संबंधित रिकॉर्ड के बारे में जानकारी मांगी |  शीर्ष अदालत ने कहा कि  इस मामले को इसलिए हलके में नहीं लेना चाहिए क्यूंकि सरकार  इस पर आर्थिक स्थिति और दूसरी बातों के बारे में कह रही है  | रोहतगी ने पीठ से कहा कि खारिज की गयी याचिका से संबंधित रिकॉर्ड दाखिल करने के लिये उन्हें कुछ वक्त दिया जाए |  उन्होंने कहा कि समाज का गरीब तबका इस बैन की वजह से प्रभावित हो रहा है|

पीठ ने कहा कि । हम इस मामले को सूचीबद्ध करेंगे लेकिन पहले आप संबंधित रिकॉर्ड पेश कीजिये | राजधानी में बढ़ते प्रदूषण पर काबू पाने के लिए हरित अधिकरण ने 26 नवंबर, 2014 को अपने फैसले में कहा था कि 15 साल पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों को दिल्ली की सड़कों पर चलाने की अनुमति नहीं होगी|

इसके बाद सात अप्रैल, 2015 को अधिकरण ने  अपने आदेश में कहा कि दस साल से अधिक पुराने किसी भी वाहन को दिल्ली में चलने की अनुमति नहीं होगी|  शीर्ष अदालत ने याचिका 20 अप्रैल 2015 को  15 साल पुराने सभी डीजल और पेट्रोल वाहनों के दिल्ली की सडकों पर चलने पर बैन लगाने के अधिकरण के आदेश को चुनौती देने वाली खारिज कर दी थी |

एक वकील ने  यह याचिका दायर की थी |  जब 18 जुलाई, 2016 को अधिकरण ने दिल्ली सरकार 10 साल पुराने सभी डीजल वाहनों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का निर्देश दिया था | डीजल कार मालिकों को उस समय एक और झटका लगा था ।

 

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