Wednesday , September 20 2017
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दिल्ली: दीवारों पर लिखे उर्दू पेंटिंग को RSS कार्यकर्ताओं ने मिट्वाया, हुआ विवाद

नई दिल्ली : भारत की राजधानी दिल्ली में एक दीवार पर उर्दू रस्म पत्र में किए गए पेंटिंग जबरन मिटाए जाने की घटना ने तूल पकड़ लिया है।

रिपोर्टों के अनुसार कुछ लोगों ने दीवार पर उर्दू शेर लिखने वाले दो कलाकारों को अपने चित्रों को उन्हीं से मिटवाने और वहाँ ‘स्वच्छ’ यानी साफ भारत अभियान का नारा लिखने के लिए मजबूर किया।दिल्ली के संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा है कि वह खुद जाकर इस दीवार पर उर्दू में वाल पेंटिंग करवाएंगे जहां कथित तौर पर आरएसएस कार्यकर्ताओं ने पेंटिंग मिट्वाई थी।

बीबीसी के अनुसार कपिल मिश्रा ने कहा, “मैं खुद वहाँ जाऊँगा, उर्दू में पेंटिंग करवाऊंगा, देखते हैं कौन रोकने आता है। ‘ आम आदमी पार्टी के नेता कपिल मिश्रा ने कहा, “दिल्ली ने भाजपा और आरएसएस के कट्टर विचारधारा को नकार दिया है और इसीलिए वे बौखलाए हुए हैं। ‘

पिछले सप्ताह 19 मई को दिल्ली सरकार की अनुमति से सरकारी इमारतों की दीवारों पर एक विदेशी और एक भारतीय कलाकार ने उर्दू शेर को पेंटिंग के रूप में पेश करने की शुरुआत की थी।

उर्दू दिल्ली की चार आधिकारिक भाषाओं में से एक है:

कलाकारों ने आरोप लगाया है कि आरएसएस से जुड़े कुछ लोगों ने न केवल अपने चित्रों को उनसे मिट्वाए  बल्कि उन्हें हिंदी रस्म पत्र में इस पर ‘स्वच्छ भारत अभियान’ लिखने पर मजबूर किया।

मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा, “मैं उर्दू पेंटिंग के साथ दीवार पर वह पोस्टर भी लगाऊंगा जो नरेंद्र मोदी ने उर्दू में ट्वीट किया था। ‘उन्होंने कहा, “मोदी का उर्दू लिखना तो ठीक है और दूसरे लोग लिखें तो विरोध, यह कौन सी संस्कृति है जो ये लोग दिल्ली में लाना चाहते हैं? ‘मिश्रा ने कहा, “उर्दू ऐसी भाषा है जो दिल्ली में पैदा हुई और फिर दुनिया भर में फैली। ये लोग जो हिंदू धर्म की रक्षा की बात कर रहे हैं उन्हें हिंदू धर्म का ज्ञान ही नहीं। मैं भी हिंदू हूँ और मेरे विचार से मेरा धर्म इतना कमजोर नहीं है कि उर्दू देखकर ही डर लगता है। ‘

उर्दू दिल्ली की चार आधिकारिक भाषाओं में से एक है और दिल्ली सरकार ने ‘माई दिल्ली स्टोरी’ के तहत वर्ष 2014 में एक अभियान शुरू किया था जिसमें लोगों से दिल्ली के बारे में उनके भाव ट्विटर पर लिए गए थे।इनमें से 40 ट्वीट को चुना गया था और दूसरे चरण में अब उन्हें दिल्ली की चार आधिकारिक भाषाओं में सरकारी इमारतों पर पेंट किया जा रहा था।इस अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि यह परियोजना दिल्ली की तारीख और संस्कृति, कला, पर्यावरण और भोजन को बचाने की कोशिश है।

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