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दिल्ली दुबारा नातवां ( अंधेरे मे) , आम ज़िंदगी दिरहम ब्रहम ( परेशान)

क़ौमी दार-उल-हकूमत ( राष्ट्र की राजधानी में) आज मुतवातिर ( लगातार) दूसरे रोज़ नार्दर्न ग्रिड के दुबारा नाकाम ( Fail) हो जाने के बाद बड़े पैमाना पर ब्लैक आउटस से दो-चार हो गया है, जिस से आम ज़िंदगी मफ़लूज ( अपंग) हो कर रह गई और क़ौमी दार-उल-हकूमत ( रा

क़ौमी दार-उल-हकूमत ( राष्ट्र की राजधानी में) आज मुतवातिर ( लगातार) दूसरे रोज़ नार्दर्न ग्रिड के दुबारा नाकाम ( Fail) हो जाने के बाद बड़े पैमाना पर ब्लैक आउटस से दो-चार हो गया है, जिस से आम ज़िंदगी मफ़लूज ( अपंग) हो कर रह गई और क़ौमी दार-उल-हकूमत ( राष्ट्र की राजधानी) में तकरीबन 17 मिलियन लोगों के लिए बुनियादी ख़िदमात पर असर पड़ा है।

इतना ही नहीं नार्दर्न ग्रिड की मंगल को नाकामी का इस्टर्न और नॉर्थ इस्टर्न ग्रिड पर भी शदीद ( शख्त) असर पड़ा है और वो भी नाकाम हो गए । मग़रिबी बंगाल हुकूमत ने बंगाल, झारखंड , बिहार , उड़ीसा और सिक्किम को मुतास्सिर करने वाली नाकामी के लिए कल की नार्दर्न ग्रिड के मफ़लूज ( Fail) होने को ज़िम्मेदार क़रार दिया है।

बहरहाल तीनों इलेक्ट्रीसिटी ग्रिड्स से ज़ाइद अज़ 20 रियासतें ( राज्य) जुड़ी हैं और उन ग्रिड्स की नाकामी का करोड़ों लोगों पर असर होना तए है। चुनांचे शुमाल, मशरिक़ी और शुमाल मशरिक़ी हिंदूस्तान में फैले 20 रियासतों में बर्क़ी ( बिजली) सरबराही ( ब्यवस्था/ प्रबंध) के मस्दूद हो ( रुक) जाने का ज़ाइद अज़ 60 करोड़ अवाम पर असर पड़ा है और 6 रेलवे ज़ोन्स में ट्रेन ख़िदमात शदीद मुतास्सिर (प्रभावित) हुईं जिन से 300 ट्रेनों को रोक देना पड़ा।

दिल्ली में ग्रिड की नाकामी जो लग भग 1:02 बजे पेश आई, इससे मेट्रो और ट्रेन्स ख़िदमात में ख़लल ( बाधा) पड़ा, पानी की सरबराही का नेटवर्क टूट गया और ट्रैफिक लाइट्स बंद हो जाने के सबब ( कारण) सड़कों पर बेहंगम (बेतर्तीब) आमद‍ ओ‍ रफ्त देखी गई, जिस के नतीजा में दफ़ातिर का काम मुतास्सिर हुआ और बड़े मार्केटों में तिजारती सरगर्मियां ठप होकर रह गई।

शहर की निहायत अहम ज़रूरत दिल्ली मेट्रो मफ़लूज हो गई क्योंकि ट्रेनें पटरियों पर रोक दी गयी, बाअज़ को टरनल्स में रोकना पड़ा। इस सूरत-ए-हाल में ट्रेनों में फंसे मुसाफ़िरों को फ़ौरी ( फौरन) निकालने के इंतिज़ामात करने पड़े। 9 ट्रेनें टरनल्स के अंदर रुक गये लेकिन उन्हें करीबी स्टेशनों पर ख़ाली कर दिया गया।

तकरीबन सहपहर 3.00 बजे बर्क़ी ( बिजली) सरबराही की जुज़वी बहाली पर अक़ल्लतरीन ताद्दुद के साथ मेट्रो सर्विसेस बहाल की गयी। बर्क़ी नाकामी के सबब ( कारण) सारे शहर में बड़े पैमाना पर ट्रैफिक जाम देखने में आए क्यो‍कि ट्रैफिक लाइट्स बंद हो गई थी। ट्रेन सरविस और मुख़्तलिफ़ अस्पतालों का काम काज भी मुतास्सिर हुआ है। पीने के पानी की सरबराही का निज़ाम भी बर्क़ी कटौती का एक और बड़ा नुक़्सान रहा।

जैसा कि तमाम बड़े वाटर ट्रीटमेन्ट्स प्लांटस में पानी की तैयारी मफ़लूज (अपंग) हो कर रह गई थी जिस से पीने के पानी की शदीद क़िल्लत पैदा हो गई । ताहम दिल्ली ए रिपोर्ट पर फ़्लाईट ऑपरेशंस बदस्तूर गैर मुतास्सिर रहे क्योकी बर्क़ी सरबराही मुनक़ते ( खंडित/ कट )होने के पेश नज़र तमाम ज़रूरी ख़िदमात को डीज़ल से चलने वाले बैक अप पावर जेनरेशन सिस्टम पर मुंतक़िल कर दिया गया था।

दिल्ली के वज़ीर बर्क़ी ( उर्जा मंत्री) हारून यूसुफ़ ने कहा कि दिल्ली मेट्रो, एम्स , दिल्ली ए रिपोर्ट और रेलवे को बर्क़ी की सरबराही सहपहर 3.00 बजे तक बहाल कर दी गई जबकि शहर के 80 फीसद हिस्सा में ये सरबराही 7.00 बजे शाम तक बहाल हो गई ।

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