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दिल्ली में कोई सलामती नहीं सुप्रीम कोर्ट का रिमार्क

नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में इजतिमाई इस्मत रेज़ि के वाक़िये पर आज शदीद तशवीश का इज़हार किया और कहा कि दार-उल-हकूमत में कोई एहसास तहफ़्फ़ुज़ नहीं है क्योंकी इस तरह के वाक़ियात बारहा पेश आ रहे हैं।

नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में इजतिमाई इस्मत रेज़ि के वाक़िये पर आज शदीद तशवीश का इज़हार किया और कहा कि दार-उल-हकूमत में कोई एहसास तहफ़्फ़ुज़ नहीं है क्योंकी इस तरह के वाक़ियात बारहा पेश आ रहे हैं।

जस्टिस के ए राधा कृष्णन और जस्टिस दीपक मिसरा पर मुश्तमिल एक बेंच ने कहा कि शहर में कोई सलामती नहीं है और उसे बहाल किया जाना चाहीए । इस तरह के वाक़ियात बारहा पेश आ रहे हैं।

बेंच ने कहा कि वो ख़वातीन को सलामती का माहौल फ़राहम करने की फ़िक्र रखता है ताकि ख़वातीन भी पूरे एहतिराम के साथ रह सकें। बेंच ने क़ानून के एक तालिब-ए-इल्म की तरफ‌ से दाख़िल करदा मफ़ाद-ए-आम्मा की दरख़ास्त की समाअत करते हुए ये रिमार्कस किए ।

दरख़ास्त में ये इस्तिदा की गई थी कि अदालत दिल्ली में शहरियों को तहफ़्फ़ुज़ और सलामती फ़राहम करने के लिए हिदायात जारी करे और एक बोर्ड भी क़ायम करे ताकि इस्मत रेज़ि की मुतास्सिरा ख़वातीन को मुआवज़ा अदा किया जा सके । दरख़ास्त गुज़ार की ख़ाहिश ये भी थी कि जिन गाड़ियों में इस तरह के वाक़ियात पेश आ रहे हैं उनके लाईसैंस भी मंसूख़ किए जाएं ।

अदालत ने कहा कि बस मालकीयन को इन रूटस पर बसें चिली की इजाज़त नहीं दी जानी चाहीए जिन पर उस की कोई बस क़ानून की ख़िलाफ़वरज़ी करे । बेंच ने कहा कि हमें इस बात की फ़िक्र है कि दिल्ली में ख़वातीन को एसा सलामती वाला माहौल फ़राहम किया जाये जहां ख़वातीन पूरी इज़्ज़त और एहतिराम के साथ काम करसकें और उन के वक़ार को बहाल किया जा सके ।

बेंच ने इस दरख़ास्त पर मर्कज़ी हुकूमत एन सी टी हुकूमत और क़ौमी कमीशन बराए ख़वातीन को नोटिसें जारी हैं और उन से कहा है कि वो अंदरून दो हफ़्ते अपने जवाब दाख़िल करें।

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