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दिल्ली में नर्सों की हड़ताल गै़रक़ानूनी

नई दिल्ली 03सितम्बर: हुकूमत दिल्ली ने नर्सों की हड़ताल को गै़रक़ानूनी क़रार देते हुए क़ानून बरक़रारी लाज़िमी ख़िदमात का नफ़ाज़ अमल में लाया है क्युं कि इस हड़ताल से सरकारी दवाख़ानों में तिब्बी ख़िदमात मुतास्सिर हो गई हैं। शहर दिल्ली में डेंगू और चिकुंगुन्या के वाक़ियात बढ़ते जा रहे हैं।
मज़कूरा क़ानून के तहत हड़ताल को गै़रक़ानूनी क़रार दिया जा सकता है। वाज़िह रहे कि हुकूमत दिल्ली और मर्कज़ी हुकूमत के ज़ेरे इंतेज़ाम हॉस्पिटलों में तक़रीबन 20 हज़ार नर्सों ने तनख़्वाहों और भत्तों में इज़ाफे के मुतालिबा पर ग़ैर मुअय्यना हड़ताल शुरू कर दी है जबकि दिल्ली के तमाम बड़े दवाख़ानों में वबाई अमराज़ के मुतास्सिरीन का हुजूम देखा जा रहा है अगर हरताल से दसतबरदारी के लिए एसोसीएशन को तरग़ीब दी गई लेकिन ये कोशिश कामयाब नहीं हो सकी। ऑल इंडिया गर्वनमेंट नर्सेस एसोसीएशन के तर्जुमान लीलाधर राम चंदानी ने बताया कि हम हुकूमत के रद्द-ए-अमल पर ख़ुश नहीं हैं हमने हड़ताल शुरू कर दी है लेकिन एमरजेंसी और क्रिटिकल
केसेस में ख़िदमात पेश की जा रही हैं।

बताया जाता है कि सफदरजंग हॉस्पिटल जहां पर 1100 नर्सेस 160 कॉन्ट्रैक्ट पर हैं माह जुलाई में डेंगू के तीन मरीज़ों की मौत वाक़्ये हुई है और 29 अगस्त तक 263 डेंगू और 250 चिकुंगुन्या के मुतास्सिरीन का ईलाज किया गया है। शहर दिल्ली में गंदगी और ग़लाज़त के बाइस वबाई अमराज़ में इज़ाफ़ा हो रहा है।

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