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दिल्ली मेट्रो का किराया बढ़ाना जन विरोधी कदम

स्वराज इंडिया ने दिल्ली मेट्रो रेल किराया बढ़ाने के निर्णय को जन-विरोधी कदम बताया है। पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अनुपम ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी की लगातार बढ़ती आबादी के लिए आज भी सार्वजनिक परिवहन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। दिल्ली की सड़कों पर लंबे जाम का लगना रोज़ की कहानी हो गई है, जिसके कारण दिल्लीवासियों के दिनचर्या पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। साथ ही, दिल्ली में डीटीसी बसों की व्यवस्था भी चरमराई हुई है।

दिल्ली मेट्रो रेलवे ने देश की राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में एक अहम योगदान निभाया है। लेकिन 6 महीने में दो बार किराए में अप्रत्याशित वृद्धि दिल्ली के छात्रों, महिलाओं, आम जनता, ग़रीब एवं मध्यम वर्ग पर कठोर वार है। बीते 10 मई को वर्ष 2009 के बाद पहली बार मेट्रो किराया बढ़ाया गया था इसलिए स्वराज इंडिया ने पिछली वृद्धि का विरोध नहीं किया। परिवहन सेवा के विकास के लिए मेट्रो का फ़ायदे में चलना आवश्यक है।

लेकिन अब आगामी 3 अक्टूबर से दुबारा किराए में बढ़ोत्तरी की जा रही है। ये भी जानकारी मिल रही है कि इस वृद्धि का निर्णय मई की बैठक में ही ले लिया गया था। मात्र 6 महीने की समय सीमा में किराए में हो रहे इस बढ़ोत्तरी पर स्वराज इंडिया ने कड़ा विरोध जताया है।

अनुपम ने मांग किया कि 3 अक्टूबर से मेट्रो रेल के बढ़ने वाले किराए पर तत्काल रोक लगे और किराया वृद्धि संबंधी अगली कोई भी समीक्षा कम से कम एक साल तक न हो। वरना इस जनविरोधी निर्णय से दिल्ली के छात्रों, ग़रीब एवं मध्यम वर्ग परिवारों की कमर टूट जाएगी। मेट्रो रेलवे के अपने आंकड़ों के ही अनुसार मई महीने में हुई किराया वृद्धि के बाद से रोज़ाना सफ़र करने वाले सवारियों की संख्या में लगभग 1.5 लाख की कमी आई है।

जिस तीन-सदस्यीय किराया निर्धारण समिति ने ये सुझाव दिए थे उसमें सेवानिवृत हाई कोर्ट जज और शहरी विकास मंत्रालय के सचिव के अलावा दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव भी थे। आरटीआई से ये भी जानकारी मिली है कि उस तीन-सदस्यीय समिति ने जापान, हॉन्ग कॉन्ग, सिंगापुर, ताईवान जैसे देशों में किराए का अध्ययन करने के लिए सिर्फ़ विदेश यात्राओं पर 8.5 लाख से अधिक रुपये ख़र्च कर दिए।

ज्ञात हो कि मेट्रो रेल में केंद्र सरकार की शहरी विकास मंत्रालय और दिल्ली सरकार के बीच 50:50 की भागीदारी है। यहाँ तक कि किराये पर अंतिम निर्णय लेने वाली दिल्ली मेट्रो बोर्ड में भी दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मई महीने की जिस बैठक में ये निर्णय लिए गए उसमें दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्री भी मौजूद थे। लेकिन हैरत की बात है कि जिस दिल्ली सरकार की सहमति से किराया बढ़ाने का निर्णय हुआ उसी सरकार के मुख्यमंत्री आज बेशर्मी से विरोध का नाटक करने लगे हैं।

अनुपम ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की हरक़त को ओछी राजनीति का एक और नमूना बताते हुए सवाल किया कि अगर केजरीवाल जी को दिल्लीवासियों की इतनी ही चिंता थी तो मई महीने की बैठक में दिल्ली सरकार के प्रतिनिधि ने इसका विरोध क्यूँ नहीं किया? दो चरणों में किराया बढ़ाने के निर्णय पर स्वयं मुहर लगाने के बाद सीएम साहब अब विरोध करने का ऐसा तमाशा क्यूँ कर रहे हैं? केजरीवाल जी शायद दिल्ली की जनता को मूर्ख समझते हैं या ख़ुद को अत्यंत शातिर।

केजरीवाल जी अब अपने ही परिवहन मंत्री को पत्र लिखने का नाटक कर रहे हैं। बता रहे हैं कि किराया निर्धारण समिति ने दिल्ली सरकार के सुझाओं को नहीं माना। पहली बात तो ये कि उस तीन-सदस्यीय किराया निर्धारण समिति में स्वयं दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव थे। दूसरी बात कि किराया बढ़ाने का अंतिम निर्णय मेट्रो रेल की बोर्ड लेती है जहाँ दिल्ली सरकार समिति के किसी भी सुझाव को मानने से इनकार कर सकती थी। सच ये है कि दिल्ली के आम लोगों पर वार करके अरविंद केजरीवाल अब कुतर्क और तमाशों के सहारे ख़ुद को बचाने और पाक़-साफ़ बताने में लगी है।

स्वराज इंडिया ने मांग किया है कि पिछले 10 मई को हुए वृद्धि के बाद अब कम से कम एक साल तक किराये में बढ़ोत्तरी की कोई भी कोशिश न हो। दिल्ली मेट्रो आज देश की राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की रीढ़ है और छात्रों, गरीबों या मध्यम वर्ग को इससे दूर करने की जन-विरोधी कोशिश निंदनीय है।

स्वराज इंडिया का कहना है कि यदि इस जनविरोधी निर्णय को वापिस नहीं लिया जाता है तो दिल्ली की जनता के हक़ में पार्टी को मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ेगा।

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