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दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों को नोटबंदी पड़ी भरी

ऐसे समय में जब पूरा देश कैश की कमी से जूझ रहा है। डीयू के छात्र परीक्षा की टेंशन में व्यस्त है और जो छात्र बाहर के होस्टलों में रहते हैं जिनके पास पहले से ही सिमित पैसे होते हैं वो छात्र परीक्षा की तैयारी करने और एटीएम की कतार में लगने के समय के साथ ताल मेल बिठाने के लिए परेशान हैं। कुछ छात्रों का कहना है कि उनका मकान मालिक या उनके वार्डन कॅश में ही किराया मांग रहे हैं।

एटीएम से पैसे निकालने की सीमा भी 2000 है और छात्रों का किराया 6000 से लेकर 12,000 तक का है ऐसे में एक बार में पैसे निकालने से भी छात्रों का काम नहीं बन रहा है। अपने कीमती समय बचाने के लिए कुछ छात्र तो एटीएम की कतार में भी पढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। हंस राज कॉलेज की एक छात्रा शिफा नसीर का कहना है कि मकान मालिक प्लास्टिक मनी स्वीकार नहीं कर रहा है ऐसे में परीक्षा की तैयारी करने की छुट्टियों में मुझे एटीएम की कतार में लगने पड़ रहा है। अब हम छात्र परीक्षा की तैयारी करे या फिर एटीएम की कतार में लग कर समय बर्बाद करे।

छात्रों के लिए परीक्षा से पहले का समय बहुत कीमती होता है। जीसस एंड मेरी कॉलेज की छात्रा अंजना जॉली जो की सत्या निकेतन पीजी में रहती है उनका कहना है कि मैंने अपने मकान मालिक से कहा कि मेरी परीक्षा है अभी मैं परीक्षा के बाद आपको किराया दे दूंगी लेकिन वो नहीं माने। मेरा किराया 8000 रूपये है और मुझे वो चुकाने के लिए चार दिन रोज़ एटीएम की कतार में लगना पड़ेगा।

शिफा आगे बताती है कि, पिछले महीने 2 नवंबर को मैंने 11,000 रूपये किराया दिया था। 8 नवम्बर को नोटबंदी के बाद पीजी के मालिक ने 7,000 रूपये के पुराने नोट वापस दिए और कहा कि इसको बदल कर वापस दो। परीक्षा की तैयारी से पहले मुझे वो नोट भी बदल कर वापस देने पड़े।

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