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दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामला: सुप्रीम कोर्ट ने चारो आरोपियों की मौत की सज़ा को सुनिश्चित किया

“वह उनके आनंद की एक एक वस्तु थी … उनके सकल, दु: खमय सुखों के लिए … शैतानी तरीके से जिसमें वे उसकी गरिमा और पहचान के साथ खेले।”

ये अंतिम शब्द थे जिनके साथ न्यायमूर्ति ‘दीपक मिश्रा’ ने 2012 के दिल्ली सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में चार अपराधियों की मौत की सजा की पुष्टि करते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को समाप्त किया।

‘न्यायमूर्ति मिश्रा’ ने उपस्थित न्यायाधीश ‘आर बनुमती’ और ‘अशोक भूषण’ के साथ जब 23 वर्षीय ‘निर्भया’ के बलात्कारियो को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा दी गयी फांसी की सजा को सुनिस्थित किया तब पूरी अदालत तालियों की गरगराहट से गूंज उठी। न्यायमूर्ति ‘बनुमती’ ने एक अलग से अपने अंतिम निर्णय में कहा, “अगर इन अपराधियों को मौत की सजा नहीं दी जा सकती, तो फिर किसी अन्य को नहीं दी जा सकती”।

इस मामले मे शुक्रवार को आया यह निर्णय न्याय का अंतिम रूप है । इस निर्णय के साथ, एक साल से चल रही लगतातार सुनवाइयों का भी अंत हुआ जो इसलिए आयोजित की जा रहीं थी क्योंकि आरोपी ‘मुकेश’, ‘पवन’, ‘अक्षय कुमार सिंह’ और ‘विनय शर्मा’ ने उन्हें दी गयी मौत की सजा के खिलाफ अपील की थी।

दिसंबर 16, 2012 को दक्षिण दिल्ली में एक बस में सवार चार आरोपियो और दो अन्य लोगों ने एक लड़की पर बेरहमी से हमला किया और फिर उसका बलात्कार किया था । इस नीच कृत्य के बाद उन्होंने लड़की और उसके पुरुष मित्र को वाहन से बहार फेंक दिया था। लड़की की मौत बाद में सिंगापुर अस्पताल में हो गई थी।

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