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दिहाड़ी मजदूर, किसान के बेटे आईआईटीयन

पटना 22 जून : कहा जाता है कि हुनर किसी पनाह की मोहताज नहीं होती और अगर इन हुनरमंदों को सही रास्ता और उस पर चलने का मौक़ा दिया जाए तो इन सलाहियतों को निखरने में वक़्त नहीं लगता। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है बिहार के तालिब इल्म

पटना 22 जून : कहा जाता है कि हुनर किसी पनाह की मोहताज नहीं होती और अगर इन हुनरमंदों को सही रास्ता और उस पर चलने का मौक़ा दिया जाए तो इन सलाहियतों को निखरने में वक़्त नहीं लगता। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है बिहार के तालिब इल्म

बेगूसराय के रहने वाले हंजाला शफी आज अपनी वाल्दा के साथ पटना आया है। इसके वालिद जूते की दुकान में काम करते हैं। इसकी वाल्दा यास्मीन शफी कहती हैं, ”बहुत तकलीफ झेलकर मैंने अपने बेटे को पढ़ाया है। अल्लाह का शुक्र है कि आज सही रहनुमाई मिला और आज मेरा बेटा यहां तक पहुंच गया।”

बिहार के समस्तीपुर अज़ला के रहने वाले प्रणव के वालिद पंकज राय बे जमीन किसान हैं। वे दूसरे की जमीन को पट्टे पर लेकर किसी तरह खेती कर अपने अहले खाना का गजायियत करते हैं। किसी साल अगर बाढ़ आ गई तो तमाम फसल बर्बाद हो जाती है।

सरकारी स्कूल के तालिब इल्म रहे प्रणव बताते है कि बचपन में जब उनका दाहिना हाथ जल गया था तो उनके इलाज के लिए भी उनके घर में पैसा नहीं था। उन्होंने बताया, ”आनंद ने न केवल मेरा एतमाद बढ़ाया बल्कि मुनासिब रहनुमाई दिया।”

वह कहते हैं कि आईआईटी की दाखला इम्तेहान में वह कामयाब जरुर हुए हैं लेकिन उनका सपना आईआईटी कर भारतीय इंतेजामिया खिदमत में जाने की है।

इधर, बिहार के बांका की रहने वाली प्रीति कुमारी के वालिद अफसर मिश्रा अपने गांव और गांव के आसपास घरों में जाकर पूजा-पाठ किया करते थे। कदमत पसंद सकाफत में पली-बढ़ी प्रीति ने तो इंजीनियर का ख्वाब देख लिया था लेकिन उसके अहले खाना घर के बाहर भेजने को तैयार नहीं थे। और आज वह आईआईटी दाखला इम्तेहान में कामयाब कर गई है।

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