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दीन केलिए वक़्फ़ होने पर अल्लाह ताली की मदद

जमात-ए-इस्लामी हिंद शहर निज़ामाबाद के ज़ेरए एहतेमाम अइम्मा मसाजिद , मो अज़्ज़नीन-ओ-सदूर इंतिज़ामी कमेटी मसाजिद का एक ख़ुसूसी इजलास दफ़्तर जमात मुत्तसिल मस्जिद रज़ा बेग अहमदी बाज़ार निज़ामाबाद पर मुनाक़िद हुआ । इस इजलास का आग़ाज़ हाफ़िज़ क़ा

जमात-ए-इस्लामी हिंद शहर निज़ामाबाद के ज़ेरए एहतेमाम अइम्मा मसाजिद , मो अज़्ज़नीन-ओ-सदूर इंतिज़ामी कमेटी मसाजिद का एक ख़ुसूसी इजलास दफ़्तर जमात मुत्तसिल मस्जिद रज़ा बेग अहमदी बाज़ार निज़ामाबाद पर मुनाक़िद हुआ । इस इजलास का आग़ाज़ हाफ़िज़ क़ासिम की तिलावत-ओ-तर्जुमानी से हुआ ।

तमाम शुरका ने आपस में एक दूसरे का तआरुफ़ पेश किया । जनाब शेख जाफ़र ने इजलास के मक़ासिद ब्यान किए । इजलास से ख़िताब करते हुए जनाब अहमद अब्दुल अज़ीम अमीर मुक़ामी ने कहा कि जो शख़्स अल्लाह के दीन को क़ायम करने के लिए अपने आप को वक़्फ़ कर देता है तो अल्लाह ताली इस का हामी-ओ-मददगार बन जाता है ।

उल्मा का तबक़ा ही अल्लाह ताला से डरता है जो शख़्स अल्लाह से डरता है वही डर कर ज़िंदगी गुज़ारता है । इल्म का हासिल करना हर मुस्लमान पर फ़र्ज़ है । अगर कोई ख़तीब कोई ब्यान करता है तो वो अवाम के सारे मसाएल को जाने और पेश करे । अगर इसमें कोई ख़ियानत होती है तो वही इस का आख़िरत में ज़िम्मेदार होगा ।

जनाब अहमद अबदुल हलीम नाज़िम इलाक़ा शुमाली तेलंगाना जमात-ए-इस्लामी आंधरा प्रदेश ने अपने ख़िताब में कहा कि अल्लाह ताला ने हम को एक अहम ज़िम्मेदारी सौंपी है और साथ ही हमें इसको समझने का शऊर अता फ़रमाया । जमात-ए-इस्लामी इब्तेदा से ये कोशिश करती रही है कि मिल्लत के अंदर दीन के शऊर को ज़िम्मेदारी के साथ उजागर करें ।

अइम्मा मसाजिद और ज़िम्मादारान का एक वफ़ाक़ बनाया जाए और इसके ज़रीया से दीन का पैग़ाम मिल्लत तक पहुँचाया जाए । ये जमात-ए-इस्लामी की पॉलीसी-ओ-प्रोग्राम में दर्ज है । इसी सिलसिला की कड़ी के तौर पर शहर हैदराबाद में 55 से 60 मसाजिद के ज़िम्मेदारों का एक वफ़ाक़ बनाया गया जो बहुत मुनज़्ज़म और कारकर्द है ।

निज़ामाबाद में भी इस तरह की कोशिश शुरू की जा रही है । काबिल ए मुबारकबाद हैं ज़िम्मादारान जमात जिन्होंने ये उद्दिनी सी कोशिश शुरू की है । ये एक बड़ा काम है अल्लाह ने आप को इस का मौक़ा दिया है । आप इस के लिए बिलकुल तैयार हो जाएं । हदीस मुबारका है कि तमाम में जो बेहतर हो उस को इमाम बनाओ जो तुम्हारे और रब के दरमियान नुमाइंदा हैं चूँकि मुआशरा में दीन का तसव्वुर महिदूद होकर रह गया है ।

हुज़ूर ( स्०अ०व्०) और हुज़ूर ( स्०अ०व०) के बाद ख़ुलफ़ाए राशिदीन का दौर देखिए कि मसाजिद ही मराकज़ थे । जहां अदल-ओ-इंसाफ़ और क़वानीन निकलते हैं वो तरबियत गाह थीं शहर और मुल्क को किस तरह चलाना चाहीए आज ये चीज़ें हमारी नज़रों से ओझल हो गई हैं ।

इस मौक़ा पर ज़िम्मादारान जमात के इस्तेफ्सार पर तमाम शुरका ने महीने में एक मर्तबा इस तरह की नशिस्त के इनइक़ाद के अज़म का इज़हार किया । आइन्दा इजलास 26 अप्रैल को मुनाक़िद होगा । जनाब अहमद अबदुल हलीम की दुआ पर इजलास इख़तेताम को पहूँचा ।

मस्जिद ए कादरिया , मुस्तैद पूरा मस्जिद याक़ूब आटो नगर , मस्जिद जलील , पेंटर कॉलोनी , मस्जिद मुस्तफ़ा माला पली , मस्जिद ए अराफ़ात अहमद पूरा मस्जिद रज़ा बेग के अइम्मा इक्राम मोज़नेन-ओ-ज़िम्मा दारान ने शिरकत की ।

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