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दीढ़ सौ साल पुरानी तकनीक के ज़रीया नज़र ना आने वाला स्यारा दरयाफ़त

महिरीन-ए-फ़लकीयात ने एक स्यारा दरयाफ़त किया है जो उन के दावे के बमूजब अब तक पोशीदा स्यारा था। ये स्यारा हमारे निज़ाम शामसी के बाहर दरयाफ़त किया गया है।

महिरीन-ए-फ़लकीयात ने एक स्यारा दरयाफ़त किया है जो उन के दावे के बमूजब अब तक पोशीदा स्यारा था। ये स्यारा हमारे निज़ाम शामसी के बाहर दरयाफ़त किया गया है।

इस की दरयाफ़त के लिए 150 साल क़दीम तकनीक इस्तिमाल की गई जिस के ज़रीया क़ब्ल अज़ीं नैपचोन का पता चलाया गया था, जुनूब मग़रिबी तहक़ीक़ी इदारा के साईंसदानों की एक टीम का कहना है कि उन्हों ने स्यारा ज़ुहल की जसामत का एक स्यारा दरयाफ़त किया है, जो अपने सितारा के ओ आई 0 ‍872 के अतराफ़ मदारी गर्दिश कररहा है और अभी तक उसे देखा नहीं जा सका था।

इस की वजह ये होसकती है कि ऐसे मामूली असरात जो सय्यारे की क़ुव्वत जाज़िबा का नतीजा होते हैं , नज़र नहीं आरहे थे, रोज़नामा डेली मील की इत्तिला के बमूजब फ़्रांसीसी रियाज़ी दां अरबीन ली वेरियर ने इस स्यारा की दरयाफ़त में मदद की है।

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