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दुनिया की सबसे छोटी मशीन बनाने वालों को कैमिस्ट्री का नोबल पुरस्कार

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विश्व की सबसे छोटी मशीनों बनाने के लिए इस साल का कैमिस्ट्री नोबल पुरस्कार ज़ांग पियरे सोवाश, सर जे फ्रेज़र स्टॉडडार्ट और बेनार्ड फेरिंगा को दिया गया है। स्वीडन में हुई प्रेस कॉन्फ्रेस में इनके नामों की घोषणा की गई। तीनों वैज्ञानिकों को मॉलिक्यूल यानि आणविक स्तर पर मशीनों को डिज़ाइन करने के लिए कुल 727,000 पाउंड यानी करीब 61.5 करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि दी जाएगी।

इन वैज्ञानिकों ने जिस मशीन की खोज की है वो बाल से भी एक हज़ार गुना पतली है। इन्हें शरीर के अंदर दवा देने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। मिसाल के तौर पर कैंसर की कोशिकाओं में इसके ज़रिए दवा डाली जा सकती है। नैनो-टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में इसके ज़रिए स्मार्ट मशीनों को तैयार किया जा सकता है। आने वाले समय में मॉलिक्यूल को आपस में जोड़कर कार की मोटर से लेकर छोटी-से-छोटी मांसपेशियां तक बनाई जा सकती हैं।

जांग पियरे सोवाश 1944 में पेरिस में पैदा हुए हैं। वो स्ट्रासबर्ग यूनिवर्सिटी में प्रोफसर रहे हैं। सर फ्रेज़र स्टॉर्डडार्ट 1942 में ब्रिटेन के एडिनबर्ग में जन्मे और अमरीका की नॉर्थ वेस्ट यूनिवर्सिटी के साथ जुड़े हैं। बेर्नाड एल फेरिंगा 1951 में नीदरलैंड में पैदा हुए और नीदरलैंड की ग्रॉनिंगन यूनिवर्सिटी में ऑर्गेनिक कैमिस्ट्री के प्रोफेसर हैं।

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