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दुनिया में दस फ़ीसद अफ़राद ज़हनी अमराज़ के शिकार

बीदर 09 जनवरी (सियासत डिस्ट्रिक्ट न्यूज़) जस्टिस एन कुमार कर्नाटक हाईकोर्ट ने ज़हनी माज़ूर यन-ओ-मुतास्सिरीन पर ताक़त के इस्तिमाल को इंसानी हुक़ूक़ की ख़िलाफ़वरज़ी क़रार दिया ही। मौसूफ़ रंग मंदिर बीदर में मुनाक़िदा ज़हनी सेहत मालूमाती प्रोग

बीदर 09 जनवरी (सियासत डिस्ट्रिक्ट न्यूज़) जस्टिस एन कुमार कर्नाटक हाईकोर्ट ने ज़हनी माज़ूर यन-ओ-मुतास्सिरीन पर ताक़त के इस्तिमाल को इंसानी हुक़ूक़ की ख़िलाफ़वरज़ी क़रार दिया ही। मौसूफ़ रंग मंदिर बीदर में मुनाक़िदा ज़हनी सेहत मालूमाती प्रोग्राम का इफ़्तिताह करने के बाद एक इजलास को मुख़ातब कर रहे थी। उन्हों ने मश्वरा दिया कि ईलाज-ओ-मुआलिजा के साथ साथ अरकान ख़ानदान के तआवुन से ज़हनी मुतास्सिरीन को ठीक किया जा सकता ही। उन्हों ने बताया कि जिस्मानी अमराज़ का ज़हनी मरीज़ों पर असर पड़ता है और फिर एक सर्वे के मुताबिक़ मग़रिबी तहज़ीब का ज़्यादा असर ज़हनी मरीज़ों पर हुआ ही। दुनिया में ज़ाइद अज़ दस फ़ीसद लोग ज़हनी अमराज़ का शिकार हैं, जब कि अमरीका में ये मर्ज़ 30 फ़ीसद ही, वहां औरत और मर्द का आज़ादाना सनफ़ी ताल्लुक़ एक आम बात ही।

जस्टिस कुमार ने बताया कि 20 फ़ीसद तक नौजवान ज़हनी एतबार से मुतास्सिर हो रहे हैं, जब कि हर साल 8 लाख अफ़राद ख़ुदकुशी कर रहे हैं, जिन में से 86 फ़ीसद लोगों का ग़रीब और मुतवस्सित तबक़ा से ताल्लुक़ ही। ख़ुदकुशी के वाक़ियात में हिंदूस्तान के शहरों में बैंगलौर का पहला नंबर ही। उन्हों ने मज़ीद बताया कि बैंगलौर में ख़ुदकुशी करने वाला कोई भी ग़रीब आदमी नहीं ही, बल्कि डॉक्टर्स, इंजीनियर्स, सरमायादार और तालीम-ए-याफ़ता लोग ही ज़्यादा तादाद में ख़ुदकुशी कर रहे हैं। कर्नाटक के 30 अज़ला में क़ायम हॉस्पिटल्स में ज़हनी अमराज़ की तशख़ीस के लिए एक डाक्टर को मुतय्यन किया गया ही, जिन्हें ज़रूरी अदवियात भी फ़राहम की गई हैं।

डाक्टर शशी कल्ला डिस्ट्रिक्ट ऐंड सैशन जज बीदर ने सदारत की। मसरज़ समीर शुक्ला डिप्टी कमिशनर, इन सतीश कुमार एस पी, डाक्टर चलवाराजो डिस्ट्रिक्ट हैल्थ ऑफीसर, बार एसोसी उष्ण कोर्ट बीदर के सदर मिस्टर महादेव पाटल शहि नशीन पर मौजूद थे

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