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देश के संविधान के ख़िलाफ़ ‘शरीअत’ में दखल अंदाजी क़ुबूल नहीं: मौलाना अरशद मदनी

प्रतापगढ़। जमीअत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा है कि देश के धर्मनिरपेक्ष संविधान के विपरीत शरीअत में हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है जब कि संविधान में सभी धर्मों को पूरी आज़ादी है।

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न्यूज़ नेटवर्क समूह प्रदेश 18 के अनुसार उत्तर प्रदेश में प्रतापगढ़ जिले के दिलहोपूर बाजार के निकट भकनापूर पडाओ पर आयोजित राष्ट्रीय एकता सम्मेलन को बतौर मुख्य अतिथि मौलाना ने संबोधित करते हुए कहा कि देश में रहने वाले सभी भारतीय हैं उसके बाद मुसलमान और हिंदू हैं। पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप करके हमें बोलने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जब सभी यह मानते हैं कि सब का मालिक एक है तो समुदाय के नाम पर झगड़े क्यों? उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की एक उच्च राजनीतिक पार्टी अपने राजनीतिक लाभ के लिए लोगों को लड़ा कर राजनीतिक लाभ हासिल करना चाहती है, जब कि हम देश में शांति चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि हमें इस मिट्टी से प्यार है। यह देश गंगा-जमुनी संस्कृति का केंद्र है उसको कोई प्रभावित करने की कोशिश करेगा तो देश की जनता चुप नहीं रहेगी।
आचार्य प्रमोद कृष्णन कल्कि पीठ ने बतौर अतिथि मानद संबोधित करते हुए कहा कि प्यार का रिश्ता भावनाओं से है दिमाग से नहीं। आज देश की एक राजनीतिक पार्टी प्यार के नाम पर नफरत की खेती को प्राथमिकता दे रही है। शहीद भगत सिंह और अशफाकुल्लाह ने हिंदू मुसलमान के लिए शहादत पेश नहीं की बल्कि भारत के लिए शहीद हुए। आज हिंदुत्व के नाम पर दिलों में दीवार खड़ी की जा रही है जो देश की गंगा-जमुनी संस्कृति के लिए बहुत खतरनाक है .भारत हिंदू मुसलमानों का नहीं बल्कि सवा करोड़ भारतीयों का है। उन्होंने नोट विलोपन से संबंधित केंद्र सरकार को निशाना बनाते हुए कहा कि नोट बदलने की नहीं बल्कि दिल बदलने की जरूरत है।

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