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देश में कैश के लिए हर तरफ़ अफरा-तफरी, लोगों में जबर्दस्त गुस्सा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक झटके में देश की कुल करेंसी से लगभग 86 फीसदी नोटों (500 और 1000) को गैरकानूनी करार दिया है। इस फैसले से देशभर में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। देश में करोड़ों लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि वह अपने पास मौजूद 500 और 1000 रुपये के नोटों का क्या करे। इस फैसले से देश के लोगों के परेशानी का जबर्दस्त सामना करना पड़ रहा है। आये दिन मौत की खबरें भी मिल रही है। लोगों में गुस्सा का ठिकाना नहीं है।

‘आजतक’ पर छपी खबर के मुताबिक, यह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी देश ने करेंसी सुधार के लिए डिमॉनेटाइजेशन प्रक्रिया शुरू की और कोहराम पूरे देश में मच गया हो। हालांकि, कई विकसित देशों ने जब अपनी करेंसी मार्केट के साथ छेड़छाड़ की, तो उन्हें आसानी से सुधार कार्यक्रम लागू करने में सफलता मिली।

जैसे 1971 में इंग्लैंड ने अपनी करेंसी के साथ बड़ी छेड़छाड़ करते हुए रोमन काल से चले आ रहे सिक्कों को हटाने के लिए पाउंड में दश्मलव पद्दति लागू किया था। बैंकिंग और करेंसी की टर्म में इस प्रक्रिया को डेसिमलाइजेशन कहा जाता है। इस प्रक्रिया को लागू करने के लिए इंग्लैंड सरकार ने सभी बैंकों को चार दिन का वक्त दिया, जिससे नई करेंसी को पूरे देश में पहुंचाया जा सके। इस दौरान देश के सभी बैंक बंद रहे. माना जाता है कि इंग्लैंड ने सफलता के साथ अपनी अर्थव्यवस्था से पूराने सिक्कों को बाहर कर दिया और किसी बड़े नुकासन का सामना नहीं करना पड़ा।

इसके बाद यूरोप में करेंसी के साथ बड़ी छेड़छाड़ का दूसरा मौका जनवरी 2002 में आया, जब यूरोपियन यूनियन के 11 देशों ने नई यूरो करेंसी लागू की (बाद में 12वें देश ग्रीस ने लागू किया)। हालांकि, यूरो का जन्म 1999 में हो चुका था और ये सभी देश तीन साल तक इस नई करेंसी को लीगल टेंडर घोषित करने के लिए तैयारी कर रहे थे। यह एक सोची-समझी रणनीति और लंबी तैयारी का नतीजा था कि यूरोप के इन 12 देशों में नई करेंसी को सफलता के साथ लॉन्च कर दिया गया।

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