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देश में जेएनयू के लिए बौद्धिक समर्थन: रोमिला थापर

नई दिल्ली: मशहूर इतिहासकार रोमिला थापर ने कहा कि संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू की फांसी के खिलाफ आयोजित कार्यक्रम से उभरे विवाद के चलते जेएनयू को कोई धक्का नहीं लगेगा क्योंकि इसके लिए ‘‘बौद्धिक समर्थन’’ है।

रोमिला ने कहा कि जब तक कोई सरकार पूरी तरह ‘‘लोकतंत्र विरोधी तानाशाही’’ में नहीं बदल जाती उसके लिए चिंतन प्रक्रिया को ‘‘नियंत्रित’’ करना मुश्किल होने जा रहा है।

जेएनयू की प्रोफेसर एमेरिटा रोमिला ने पीटीआई-भाषा के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘जएनयू को कोई धक्का नहीं पहुंचने वाला है क्योंकि देश में इसके लिए बहुत बौद्धिक समर्थन है। दूसरे विश्वविद्यालय भी हैं जो विविध मुद्दों पर चर्चा करते हैं जैसा जेएनयू में होता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘किसी विश्वविद्यालय का वजूद इस मंशा के लिए है – हर तरह के विचारों पर चर्चा करने के लिए।’’ रोमिला ने कहा, ‘‘अगर कोई सरकार पूरी तरह लोकतंत्र विरोधी तानाशाही में बदल नहीं जाए तो उसके लिए इस सोचने-विचारने पर नियंत्रण करना और नियंत्रण करने की कोशिश करना बेहद कठिन होने जा रहा है। अगर वह ऐसा करती है तो वह शासन के दूसरे पहलुओं को नुकसान पहुंचाएगी जैसा जहां जहां तानाशाही स्थापित हुई है, दिखा है।’’ वर्ष 1992 और 2005 में दो दो बार पद्म भूषण सम्मान स्वीकार करने से इनकार कर चुकी इतिहासकार ने कहा कि विश्वविद्यालयों पर हमले लोगों के सोचने की शक्ति पर नियंत्रण करने का एक प्रयास है और यह प्रयास जब जब किया गया है, नाकाम रहा है।

(पीटीआई के हवाले से ख़बर)

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