Friday , October 20 2017
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देही हिन्दुस्तान की तरक़्क़ी के लिए मोदी की नई एम पी मॉडल विलेज स्कीम का आग़ाज़

देही हिंन्दुस्तान को तरक़्क़ी देने की ख़ाहिश के साथ वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी ने आज एक पुरजोश स्कीम की शुरूआत की जिस के तहत उन्होंने लग भग 800 एम पीज़‌ में हर एक से अपील की कि 2019 तक तीन देहातों के माद्दी और इदारा जाती ढांचा को फ़रोग़ दें। सां

देही हिंन्दुस्तान को तरक़्क़ी देने की ख़ाहिश के साथ वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी ने आज एक पुरजोश स्कीम की शुरूआत की जिस के तहत उन्होंने लग भग 800 एम पीज़‌ में हर एक से अपील की कि 2019 तक तीन देहातों के माद्दी और इदारा जाती ढांचा को फ़रोग़ दें। सांसद आदर्श ग्राम योजना (एम पी मॉडल विलेज स्कीम) के तहत जिस का मोदी ने अपने यौमे आज़ादी ख़िताब में ऐलान किया था, हर एम पी कोई भी गा के इंतेख़ाब के लिए आज़ाद होगा लेकिन ये इस का आबाई या इस के ससुराल वालों का गाँव नहीं होना चाहिए।

मोदी ने कहा कि वो उत्तरप्रदेश में अपने पारलीमानी हलक़ा वाराणसी के किसी गाँव‌ को मुंतख़ब करेंगे। अगर तमाम अरकान पार्लीमान फीकस तीन गाँव‌ को अपनालें तो लग भग 2500 देहात की 2019 तक तरक़्क़ी होजाएगी। ये स्कीम का आग़ाज़ करते हुए वज़ीर-ए-आज़म ने कहा कि ये सोचा गया है कि रुकन पार्लियामेंट‌ की क़ियादत और कोशिशों के ज़रिए एक, एक गाँव‌ की हर एम पी की जानिब से 2016 तक तरक़्क़ी होगी।

इस तजुर्बे से हासिल नमूने की असास पर ये अंदाज़ा है कि हर एम पी की जानिब से मज़ीद दो गाँव‌ की तरक़्क़ी 2019 तक होजाएगी और ये कि एक गाँव‌ की हर साल तरक़्क़ी होगी। मोदी ने कहा, हम लग भग 800 एम पीज़‌ हैं। अगर 2019 से क़ब्ल हम में से हर एक तीन गाँव‌ को तरक़्क़ी देता है तो हम तक़रीबन 2,500 देहात का निशाना मुकम्मल करलेंगे।

अगर इस स्कीम की रोशनी में रियासतें भी इसी तरह की स्कीम एम एल ए के लिए तशकील देती हैं तो मज़ीद 6 ता 7 हज़ार देहात का इज़ाफ़ा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अभी तक मुल्क में जो तरक़्क़ी का नमूने पर अमल किया जाता रहा, वो बड़ी हद तक सरबराही पर मबनी रहा है।

उन्होंने कहा, दिल्ली, लखनऊ या गांधी नगर में कोई स्कीम तैयार करके उसे हर जगह सराएत करने की कोशिश की जाती है। इस आदर्श ग्राम (स्कीम) के ज़रिए हम स्पलाई पर मबनी नमूने को बदल कर तलब से मरबूत मॉडल बनाना चाहते हैं। उन्होंने ये भी कहा कि ऐसा माहौल बनाना चाहिए जहां हर शख़्स को अपने गाँव‌ पर फ़ख़र महसूस हो।

वज़ीर-ए-आज़म ने कहा कि देही हिन्दुस्तान का वसीअतर दौरा करने के बाद उन्होंने ये राय क़ायम की है कि देहात की तरक़्क़ी सिर्फ़ अवाम की मशग़ूलियत के ज़रिए ही की जा सकती है। उन्होंने कहा : ये कोई रक़म पर मबनी स्कीम नहीं। ये अवाम से मरबूत है और अवाम की शिरकत के साथ आगे बढ़ने वाली है।

गाँव‌ में रहने वाले अवाम की उमंगें शहरों में रहने वालों की उमंगों से कुछ भी कम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मुल्क को आज़ादी मिलने के बाद तमाम हुकूमतों ने देही तरक़्क़ी के लिए अपने तरीक़े से काम किया लेकिन ये मसाई को जहद मुसलसल बनाना है जिस में बदलते वक़्तों के मुताबिक़ तब्दीलियों को शामिल करते जाएं।

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