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देही ज़ामिन रोज़गार स्कीम केलिए फंड्स की इजराई

नई दिल्ली

नई दिल्ली

रियासतों के अनुदेशों को दूर करते हुए मर्कज़ ने आज कहा है कि वो महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट ग्यारंटी एक्ट (फ़राहमी देही रोज़गार स्कीम) को मुस्तहकम बनाने के अह्द पर कारबन्द है और तरक़्क़ी याफ़ता शक्ल में स्कीम पर अमलावरी केलिए बगैर किसी रुकावट के फंड्स की फ़राहमी केलिए मुम्किना इक़दामात किए जाएंगे।

वज़ीर देही तरक़ियाती मिस्टर चौधरी वीरेंद्र सिंह ने ये स्कीम की बदौलत देही इलाक़ों से शहरों को मज़दूरों की नक़ल मुक़ामी की रोक थाम की निशानदेही करते हुए कहा कि स्कीम पर अमलावरी केलिए मज़ीद फंड्स की इजराई पर वो बहुत जल्द विज़ारते फाईनेंस‌ से नुमाइंदगी करेंगे जो कि फ़रोग़ महारत का अहम ज़रिया है।

यौमे महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट ग्यारंटी एक्ट (MNREGA) की 10 साला तक़रीब से मुख़ातिब करते हुए उन्होंने कहा कि उमूमन हम मियारी असासा जात और बुनियादी सहूलियात (इनफ्रास्ट्रक्चर ) की बात करते हैं लेकिन अब मज़कूरा स्कीम के तहत इंसानी वसाइल को फ़रोग़ देने पर तवज्जे देने की ज़रूरत है।

चौधरी बिरेन्द्र सिंह ने कहा कि हुकूमत ज़ामिन रोज़गार स्कीम के मज़दूरों को गैर हुनर मंदिर रखना नहीं चाहती और उन्हें हुनरमंद और महारत से आरास्ता करने केलिए कोशिश की जाएगी। उन्होंने बताया कि अगर हम 30 देही नौजवानों को मुसल्लह अफ़्वाज में शमूलियत किए हैं, जिस्मानी तरबियत देने हैं तो ये तरकीब कारामद बात होगी और इसी मक़सद केलिए रीटाइरड सिक्योरिटी अहलकार के ज़रिया दो माह की तरबियत दी जा सकती है।

ज़ामिन रोज़गार स्कीम के मज़दूरों की तरह इन नौजवानों के साथ तर्ज़ अमल इख़तेयार नहीं किया जाएगा । मर्कज़ी वज़ीर ने कहा कि अगर तरबियत दहिंदा (ट्रेनर) मियारी असासा तख़लीक़ करता है तो ये इंसानी असासा साबित होगा। उन्होंने कहा कि कम अज़ कम 100 दिन देहातों में रोज़गार फ़राहम करने केलिए हुनरमंदी को फ़रोग़ देने की ज़रूरत को उजागर किया।

अगर हमें देहातों से नक़्ल-ए-मकानी रोकना है तो इस तरह का क़दम दिखाना पड़ेगा। बाज़ रियासतों की जानिब से फ़ंड की इजराई में ताख़ीर की शिकायत पर उन्होंने कहा कि अक्सर-ओ-बेशतर मर्कज़ को इल्ज़ाम ठहराया जाता है जबकि मर्कज़ से फंड्स तल्ब करते वक़्त ऑडिट रिपोर्ट रवाना नहीं की जाती।

उन्होंने ये भी इशारा दिया कि अगर एक रियासत में मज़कूरा स्कीम का फ़ंड इस्तेमाल नहीं किया गया तो दूसरी रियासत मुंतक़िल किया जाएगा जहां पर फंड्स की अशद ज़रूरत होती है। उन्होंने बताया कि उनकी विज़ारत ने फैसला किया कि दीगर स्कीमात के साथ ज़ामिन रोज़गार स्कीम को ज़म करने पर तवज्जे दी जाये ताकि एक पाएदार और कारआमद असासाजात पैदा किए जा सकीं और 21 रियासतों ने इंज़िमाम के मंसूबों को क़तईयत देदी है और बहुत जल्द देही मईशत पर इस के असरात देखे जाएंगे। उन्होंने कहा कि देही ज़ामिन रोज़गार स्कीम का बुनियादी मक़सद ठोस तरक़्क़ी के साथ जुज़ मआश फ़राहम करता है।

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