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दोनों राज्यों के चीफ़ मिनिस्टर्स से मुसलमान निराश

हैदराबाद 12 नवंबर: अल्पसंख्यकों के विकास और सहानुभूति के दावे करने वाले चीफ मिनिस्टर्स ने अल्पसंख्यक तबक़ा को निराश कर दिया। देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद के जन्म दिन को हर साल दिवस अल्पसंख्यक कल्याण ‘और’ शिक्षा दिवस ‘के रूप में मनाया जाता है। राज्य आंध्र प्रदेश में यह परंपरा रही है कि चीफ़ मिनिस्टर्स ने समारोह में भाग लिया लेकिन अफसोस कि राज्य के विभाजन के बाद से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश दोनों राज्यों के चीफ़ मिनिस्टर्स ने इन समारोहों से खुद को दूर रखा।

दिलचस्प बात तो यह है कि दोनों प्रमुख मिनिस्टर्स अल्पसंख्यकों की भलाई और उनके विकास के बारे में बुलंद दावे करने में एक दूसरे से आगे जाने की कोशिश करते हैं लेकिन आज दोनों राज्यों में आयोजित दिवस अल्पसंख्यक कल्याण समारोहों में उनकी गैर भागीदारी मुसलमानों को निराशा हुई।

राज्य के विभाजन के बाद से तीसरी बार दिवस अल्पसंख्यक कल्याण का आयोजन किया गया जिसमें बावक़ार मौलाना आज़ाद क़ौमी पुरस्कार’ प्रदान किया जाता है लेकिन दोनों प्रमुख मिनिस्टर्स इस समारोह से गैरहाज़िर रहे रहे। अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार के मामले में दोनों का रवैया समान दिखाई देता है।

यह एक संयोग ही है कि इस साल हज सीजन में यात्रियों को विदा करने के लिए भी दोनों प्रमुख मिनिस्टर्स हाजिर नहीं हुए थे जबकि 2015 में दोनों ने अपने राज्य के आज़मीन को विदा किया था। हालांकि विभिन्न समस्याओं में दोनों प्रमुख मिनिस्टर्स की राय अलग है लेकिन अल्पसंख्यकों के मामले में दोनों का व्यवहार समान दिखाई दे रहा है।

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