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दोनों शहरों में महल्लों और इलाक़ों के मुस्लिम नामों की तबदीली की मुहिम

दोनों शहरों हैदराबाद और सिकंदराबाद के मुख़्तलिफ़ इलाक़ों के नामों की तबदीली के ज़रीए फ़िर्कापरस्ती की एक नई हवा चलाने कोशिश की जा रही है। पुराने शहर के इलाक़ों में ये कोशिश गुज़िश्ता चंद माह से इंतिहाई तेज़ हो चुकी है और मुहल्लाजात के

दोनों शहरों हैदराबाद और सिकंदराबाद के मुख़्तलिफ़ इलाक़ों के नामों की तबदीली के ज़रीए फ़िर्कापरस्ती की एक नई हवा चलाने कोशिश की जा रही है। पुराने शहर के इलाक़ों में ये कोशिश गुज़िश्ता चंद माह से इंतिहाई तेज़ हो चुकी है और मुहल्लाजात के नामों की तबदीली के ज़रीए उन्हें अक्सरीयती तबक़ा से ताल्लुक़ रखने वाले नामों से पुकारे जाने के रुजहान में इज़ाफ़ा करने की मुख़्तलिफ़ तरीक़ों से कोशिश की जा रही है।

साबिक़ में हैदराबाद के नाम की फ़िर्क़ा परस्तों की जानिब से तबदीली के मुतालिबा शिद्दत इख़्तियार करते रहे लेकिन उस में नाकामी के बाद मुनज़्ज़म अंदाज़ में शहर हैदराबाद के मुहल्लाजात के नामों को तबदील किया जाने लगा है। हालिया अर्सा में अलीयाबाद के इलाक़ा को आर्याबाद के नाम से फ़रोग़ देने की मुनज़्ज़म अंदाज़ में कोशिश का आग़ाज़ हुवा है।

साबिक़ में किशन बाग़ के आगे वाक़े इलाक़ा नदी मोसी अलीगुड़ा को इसी तरह तबदीली करते हुए आम बोल चाल वाले अंदाज़ में नंदी मोसलाई गुड़ा की हैसियत से फ़रोग़ दिया गया और आज हर ख़ास और आम इस इलाक़ा को नंदी मोसलाई गुड़ा के नाम से ही जानता है। इसी तरह कारवाँ के इलाक़ा रहीम पूरा को भी फ़िर्क़ा परस्तों की जानिब से राम पूरा पुकारा जाने लगा है। इस सूरते हाल से शहर की तारीख़ी इमारतें और बाज़ार भी महफ़ूज़ नहीं हैं।

कमान सह्र बातिल को फ़िर्कापरस्त विनायक द्वार कहने लगे हैं। इसी तरह साबिक़ में ज़ियागुड़ा को जियागुड़ा कहते हुए अब इतना आम कर दिया गया है कि इस इलाक़ा को भी लोग जिया गुड़ा ही कहने लगे हैं। सईदाबाद जो कि हैदराबाद के तारीख़ी मुहल्लाजात में एक मुहल्ला है इस मुहल्ला को फ़िर्कापरस्त सैदाबाद लिखते हैं और इसी तरह उसे फ़रोग़ देने की कोशिश भी की जा रही है।

हुसैन सागर जो कि हज़रत हुसैन शाह वली (रह) के नाम से मौसूम है इस नाम को तबदील करते हुए उसे विनायक सागर क़रार देने की कोशिशें अर्से दराज़ से जारी है और मुअज़्ज़म जाहि मार्किट चौराहे को फ़िर्कापरस्त विनायक चौक के नाम से फ़रोग़ देने की कोशिश कर रहे हैं।

सिद्दीअंबर बाज़ार के क़रीब वाक़े मुख़्तार गंज मार्किट को फ़िर्कापरस्ती के फ़रोग़ की कोशिश करने वालों ने मुक्त यार गंज कहना शुरू किया है। इसी तरह सिद्दीअंबर बाज़ार को जो कि हज़रत सिद्दीअंबर शाह बाबा (रह) के नाम से मौसूम है तबदील करते हुए सीता अंबर बाज़ार तहरीर कर रहे हैं।

महकमा डाक से ताल्लुक़ रखने वाले एक ओहदेदार ने इस तरह के नामों की तबदीली के मुताल्लिक़ पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि महकमा डाक को मुहल्लाजात के नामों की तबदीली से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता लेकिन ख़त और किताबत के लिए इस तरह के नामों का इस्तेमाल उन को फ़रोग़ का बाइस बन रहा है।
हैदराबाद के अवाम में जिस ख़ामूशी से इन नामों को फैलाने की कोशिश की जा रही है इस पर फ़ौरी तवज्जा दरकार है।

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