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दो फीसद से ज्यादा नहीं हो कॉल ड्रॉप: सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को टेलीकॉम कंपनियों को कहा कि उन्हें इस बात की जमानत देनी होगी कि कॉल ड्रॉप दो फीसद से ज्यादा नहीं होगी। जस्टिस कुरियन जोसेफ की बेंच ने सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन से कहा कि वह कोर्ट को बताएं कि टेलीकॉप कंपनियों पर कॉल ड्रॉप के लिए किस तरह की पेनल्टी लगाई गई है।सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआइ) और यूनिफाइड टेलीकॉम सर्विस प्रदाताओं की संस्था ने अर्जी दायर की थी। इसमें वोडाफोन, भारती एयरटेल और रिलायंस शामिल हैं। इन कंपनियों ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक की मांग की थी जिसमें एक जनवरी 2016 से कॉल ड्रॉप होने पर ग्राहकों को जुर्माना देने की बात कही गई थी।

सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने टेलीकॉम कंपनियों का पक्ष लेते हुए कहा कि रेडियो तरंगों की दुनिया में सब कुछ एकदम ठीक नहीं हो सकता और कॉल ड्रॉप होते रहेंगे क्योंकि उनके पास इसे रोकने की कोई टेक्नोलॉजी नहीं है। कई तरह की चीजें जैसे मौसम, नकली फोन और सेट टॉप बॉक्स जैसी चीजें कंपनियों के नियंत्रण में नहीं हैं।कोर्ट ने ये भी कहा है कि कंपनियां अपनी आय बढ़ाने के लिए इस तरह का कदम उठा रही है, इस पर क्या किसी ने कोई अध्ययन किया है। सिब्बल ने कहा कि इस तरह की कोई रिसर्च नहीं है। कोई टेलीकॉम कंपनी क्यों चाहेगी कि कॉल ड्रॉप हो। हर सैकंड की बिलिंग होती है, इससे ग्राहक सिर्फ उतने ही पैसे चुकाता जितनी वह बात करता है। उन्होंने कहा कि टेलीकॉम कंपनियों ने कॉल ड्रॉप की दो फीसदी की सीमा कभी पार नहीं की। पर अब ट्राई चाहता है कि कंपनियां हर कॉल ड्रॉप के लिए हर्जाना दे।

सिब्बल के मुताबिक ट्राई के नियम अब तक लागू नहीं हुए हैं। फिलहाल कोई भी ऑपरेटर हर्जाना नहीं दे रहा है। अगर कंपनियों को ग्राहकों को हर्जाना देना पड़ा तो टेलीकॉम कंपनियों को एक साल में 50 हजार करोड़ रुपये चुकाने होंगे। इस तरह टेलीकॉम कंपनियां खत्म हो जाएंगी।इससे पहले 3 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने सीओएआइ की दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अर्जी की सुनवाई को मंजूरी दी थी। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर को ट्राई के कॉल ड्रॉप होने पर अधिकतम तीन रुपये प्रति दिन हर्जाना देने के फैसले को सही ठहराया था। कोर्ट ने कहा था कि ये नियम ग्राहकों के हितों को देखते हुए बनाए गए है।ट्राई के आदेश के खिलाफ कंपनियां दिल्ली हाईकोर्ट गई थीं। कंपनियों ने इस आदेश को एकतरफा बताया था।

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