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दो भाई इंतिहाई मुश्किल से वालदैन के साथ ज़िंदगी की गाड़ी खींचने पर मजबूर

हैदराबाद १८ जुलाई ( सियासत न्यूज़ ) कभी कभी तक़दीर भी इंसान के साथ बड़ा भयानकमज़ाक़ करती है जहां कुछ लोगों की ज़िंदगी दूसरों केलिए ना सिर्फ इबरतनाक बल्कि कभी कभी मज़हकाख़ेज़ भी बन जाती है । आईए हम आप को ले चलते हैं पुराने शहर के मुह

हैदराबाद १८ जुलाई ( सियासत न्यूज़ ) कभी कभी तक़दीर भी इंसान के साथ बड़ा भयानकमज़ाक़ करती है जहां कुछ लोगों की ज़िंदगी दूसरों केलिए ना सिर्फ इबरतनाक बल्कि कभी कभी मज़हकाख़ेज़ भी बन जाती है । आईए हम आप को ले चलते हैं पुराने शहर के मुहल्ला सुलेमान नगर बी में जो एक सल्लम इलाक़ा है । इस इलाक़ा में एक ख़ानदान ऐसा है जो तीन बेटों और चार बेटीयों पर मुश्तमिल है ।

आप सोचेंगे इस में नई बात किया है ? पुराने शहर में अक्सर-ओ-बेशतर ख़ानदान कसीर-उल-इयाल हैं । तीन बेटों में से दो बेटे मुहम्मद जहांगीर और मुहम्मद ग़ौस पैदाइशी तौर पर माज़ूर हैं जिन की उमरें 18 और 17 साल हैं । नुमाइंदा सियासत ने जब उन से पूछा कि उन्हों ने तालीम कहां तक हासिल की तो दोनों ने जवाब दिया कि एक ने सोम तक और दूसरे ने चहारुम तक तालीम हासिल की है ।

स्कूल की माहाना फ़ीस 50 रुपय अदा करने की इन के वालदैन की इस्तिताअत नहीं थी लिहाज़ा उन्हों ने तालीम तर्क करदी । जब ये सवाल किया गया कि अब वो किया करते हैं तो दोनों ने कहा कि वो मुख़्तलिफ़ मसाजिद प्रजा कर बैठ जाते हैं जिसे आप गदागरी भी कह सकते हैं और वहां पूरा दिन गुज़ार कर 50 । 60 रुपय कमा लेते हैं । इन का कहना है कि अगर स्कूल फ़ीस और दीगर मुद्दों में इन की कफ़ालत की गई तो वो पढ़ने केलिए तैय्यार हैं । जहांगीर और ग़ौस कियु रोज़मर्रा की ज़िंदगी गुज़ारने और अपनी छोटी पाइयों वाली बंडी के ज़रीया रास्ता तै करने में तकालीफ़ का सामना करना पड़ता है ।

उन की वालिदा जहांगीर बी ने कहा कि यूं तो उन के तीन बेटे हैं । बड़ा बेटा बिलकुल नॉर्मल है लेकिन कार पिंट्र का काम करने के बावजूद घर में गुज़ारे के लिए कोई तआवुन नहीं करता । बस अपनी बीवी के साथ मगन रहता है जब कि जहांगीर बी के शौहर मुहम्मद ग़फ़्फ़ारभी कार पिंट्र हैं लेकिन अक्सर नासाज़ी मिज़ाज की वजह से वो काम पर नहीं जाते और घर पर ही रहते हैं ।

चार के मिनजुमला तीन बच्चीयों की शादी होचुकी है जब कि चौथीसना बेगम भी शादी के लायक़ है लेकिन पैसे ना होने की वजह से वो उस की शादी करने से क़ासिर हैं हालाँकि पिया मात का सिलसिला जारी है । मुहम्मद ग़फ़्फ़ार ने बताया कि इन का घर ज़ाती है जो 18 साल क़बल उन्हों ने जिस वक़्त ख़रीदा था उस वक़्त वो एक मामूली झोंपड़ी थी । लेकिन उन लोगों ने घर की मुरम्मत कर के उसे दरुस्त करवाया ।

जहांगीर और ग़ौस ने बताया कि अपनी बंडी पर बैठ कर कभी उतार के दौरान इन कातवाज़ुन बिगड़ जाता है और चोटें आती हैं । कभी हड्डी भी टूट जाती है । सरकारी तौर पर इस ख़ानदान को इमदाद मिला करती थी लेकिन गुज़शता तीन महीनों से वज़ीफ़ा रुका हुआ है । इन का कहना है कि रमज़ान उल-मुबारक का मुक़द्दस महीना अब शुरू होने वाला हैमुख़य्यर हज़रात अगर अख़बार सियासत के तवस्सुत से उन की मदद करेंगे तो अल्लाह ताली इस का अज्र उन्हें देगा । माज़ूर भाईयों के साथ बातचीत का वीडीयो siasat.com पर मुलाहिज़ा करें ।

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