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दो लड़कियों को लगीया बाज़ार में छोड़ गये दलाल

पुलिस और घरवालों का दबाव बढ़ता देख इंसानी तस्करी का शिकार मुफ्फसिल थाना इलाक़े के पंडावीर गांव के बोंडलगुटू के रहने वाले नाबालिग आशई पुरती और योवना गोप को दलाल लगिया बाज़ार में छोड़कर फरार हो गये। यह इत्तिफ़ाक़ था कि उस दिन बाजार होन

पुलिस और घरवालों का दबाव बढ़ता देख इंसानी तस्करी का शिकार मुफ्फसिल थाना इलाक़े के पंडावीर गांव के बोंडलगुटू के रहने वाले नाबालिग आशई पुरती और योवना गोप को दलाल लगिया बाज़ार में छोड़कर फरार हो गये। यह इत्तिफ़ाक़ था कि उस दिन बाजार होने की वजह से नाबालिगों के अहले खाना उन्हें बाजार में मिल गये और दोनों अपने घर पहुंच सकी। इंसानी तस्करी का शिकार गंजड़ा की जयंती बोयपायी पहले ही घर लौट चुकी है। वहीं सरस्वती बोयपायी अब तक गायब है।

14 जून 2012 को काम दिलाने के बहाने चारों नाबालिगों को सिम्बिया गांव के बुड़ी करकुसा व दीपा करकुसा दिल्ली ले गये थे। यहां से उन्हें मुखतलिफ़ जगह भेजा गया। इनमें से जयंती बोयपाई किसी तरह उनके चंगुल से छूटकर भाग निकली। उसकी आपबीती सुनने पर दूसरे नाबालिगों के अहले खाना परेशान हो उठे। तमाम नाबालिगों के अहले खाना ने सात फरवरी 2014 को मुफ्फसिल थाने में इसकी सनाह दर्ज करायी। पुलिस के बढ़ते दबाव के दरमियान 27 फरवरी को दलाल योवना व आशई को लगीया बाजार में छोड़ गये।

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