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धर्म के नाम पर पार्टियों के लिए वोट मांगने वाले बाबाओं पर लगेगी लगाम,सुप्रीम कोर्ट ने उठाये सवाल

 

नई दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट ने वोट मांगने के लिए धर्म गुरुओं पर ऐतराज जताया है। कोर्ट ने कहा है कि किसी एक विशेष पार्टी या उम्मीदवार के लिए धर्मगुरुओं और आध्यात्मिक नेताओं पर चुनाव कानून के तहत कार्यवायी क्यों नही की जा सकती। दो दशक पुराने हिंदुत्व की पारिभाषा के संबधित फैसले पर दोबारा से विचार कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यह सवाल उठाया।

सेक्शन 124 (3) जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत ऐसी प्रत्याशी को अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

सेक्शन 123 के मुताबिक कोई भी उम्मीदवार धर्म, जाति,संप्रदाय या भाषा के आधार पर चुनावी फायदा उठाता है तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी कानून के आधार पर कहा धर्मगुरुओं का राजनैतिक पार्टियों का इस्तेमाल भी सेक्शन 123 के जांच के दायरे में आता है जो भ्रष्ठ क्रियाकलापों वाली चुनावी गतिविधियों सें संबधित है।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा अगर कोई कोई धार्मिक नेता या संत ऐसा बयान रिकॉर्ड करता है, जिसमें धर्म के नाम पर किसी खास पार्टी या कैंडिडेट को वोट देने की अपील की जाती है। बाद में इस बयान का इस्तेमाल पार्टी चुनावी रैलियों करती है तो ये जनप्रतिनिधित्व कानून के सेक्शन 123(3) के तहत आता है

सुप्रीम कोर्ट ने कहा चुनावी मौसम ऐसे धर्मगुरु सक्रिय हो जाते हैं। और सांम्प्रदायिक माहौल बनाने के लिए जहर भरा बयान देने लगते हैं। ऐसे में अगर किसी एक पार्टी या उम्मीदवार के पक्ष में खड़े होकर इसतरह की बयानबाजी कर रहे हो तो उनपे सेक्शन 123 (3) के तहत कार्यवायी क्यों नहीं की जा सकती है?

आपको बता दें कि मुंबई की सांताक्रूज सीट से भाजपा के टिकट पर 1990 में सिंह का विधायक के तौर पर निर्वाचन -हाई कोर्ट ने निरस्त कर दिया था। शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे और बीजेपी नेता प्रमोद महाजन ने कथित तौर पर हिंदू राष्ट्र और हिंदूओं के नाम पर सिंह के लिए वोट मांगे थे।

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