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धुंआधार उदघाटन, अखिलेश ने चुनाव से पहले सेट किया विकास का एजेंडा

लखनऊ: (फैसल फरीद)  कल लखनऊ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रिकॉर्ड बनाते हुए अपना चुनावी अजेंडा साफ़ कर दिया. एक दिन में 5709 परियोजनाओ जिनकी लगत लगभग 26000 करोड़ है का शिलान्यास और लोकार्पण किया. अखिलेश ने 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की याद ताज़ा कर दी. जब चुनाव से पहले उन्होंने ने लगभग 16000 करोड़ की योजनाओ का शिलान्यास किया था. इतने वृहद् पैमाने पर आयोजित कार्यक्रम में अखिलेश ने एक बात साफ़ कर दी. वो चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ेंगे.
हालाँकि विपक्ष अभी भी आरोप लगा रहा हैं की ज़्यादातर योजनाये आधी अधूरी हैं. लेकिन फिर भी अखिलेश ने कई महत्वपूर्ण योजनाओ को जनता के सामने रख दिया. कल सुबह ही पत्रकारों को सुबह सुबह मेसेज किया गया की मुख्यमंत्री कई उदघाटन करेंगे इसीलिए कवरेज के लिए फ्री बस सेवा उपलब्ध करायी गयी है. उत्तर प्रदेश में ये आम बात हैं क्योंकि ज़्यादातर राजनितिक पार्टिया अपने कार्यक्रमों में पत्रकारों को ले जाने के लिए बंदोबस्त करती हैं. लेकिन किसी ने गुमान भी नही किया था की इतने बड़े पैमाने पर कार्यक्रम होगा.
कार्यक्रम लखनऊ में सात अलग अलग स्थानों पर हुआ. लखनऊ को जो नए तोहफे मिले उनमे—२०० बीएड का मदर एंड चाइल्ड रेफरल हॉस्पिटल, अत्याधुनिक सीजी सिटी में कैंसर इंस्टिट्यूट, शान-इ-अवध परियोजना, जहाँ कई नामी कंप्यूटर कंपनियां अपने दफ्तर खोलेंगी, खूबसूरत जेपी इंटरनेशनल सेण्टर, आज़ादी के बाद गोमती पर लाल पुल के बराबर दूसरा पुल, इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम और भी बहुत सी परियोजनाए.
अखिलेश ने ये भी कहा की हो सकता है पूर्वांचल एक्सप्रेसवे जो लखनऊ को बलिया से जोड़ेगा उसका भी शिलान्यास जल्द से जल्द हो जाये. अखिलेश इससे पहले लखनऊ में मेट्रो रेल सेवा और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का लोकार्पण कर चुके हैं. वैसे ये आप-धापी इस वजह से और होती है की मालूम है पता नहीं कब राज्य में आचार संहिता लग जाये और सारे काम रोक दिए जाये. अखिलेश ने बीजेपी पर निशाना भी साधा की उनका विकास सिर्फ जुमला हैं.
इन ताबड़तोड़ परियोजनाओ का लोकार्पण करने के पीछे अखिलेश का राजनितिक कारण भी हैं. समाजवादी पार्टी अच्छी तरह समझती हैं की बीजेपी के एजेंडा मतलब ध्रुवीकरण की राजनीति पर वो मैदान में नहीं टिक पायेगी. इसीलिए उसकी कोशिश हैं की चुनाव को विकास के मुद्दे पर मोड़ा जाये. इससे सपा के ऊपर लगे आरोप जैसे ख़राब कानून व्यवस्था भी हलके पड़ेंगे. २०१४ के लोक सभा चुय्नव में सपा आमने सामने में बुरी तरह पिट चुकी हैं.
विकास के मुद्दे को परवान चढाने पर बीजेपी भी बच्क्फूत पर आ जाएगी. अखिलेश पहले ही अपना विडियो काम बोलता हैं जारी कर चुके हैं. वही दूसरी ओर बसपा को भी विकास के मुद्दे पर सपा को घेरने पर परेशानी होगी. हालाँकि वो अभी यहो आरोप लगा रही है की साड़ी योजनाये आधी अधूरी हैं. बाट कुछ भी हो लेकिन अखिलेश यादव ने धुंधार उद्घाटन के झड़ी लगा कर खलबली तो मचा दी हैं.
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