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धोका की शादियों से चौकन्ना रहने की ज़रूरत

नुमाइंदा ख़ुसूसी-

नुमाइंदा ख़ुसूसी-

इस्लाम चूँ कि दीने फ़ित्रत है । इस लिए इंसानी फ़ित्री तक़ाज़ों के पेश नज़र उस ने मर्दों को चार औरतों तक निकाह में रखने की इजाज़त दी है । इस शर्त के साथ कि इन के दरमियान लेन देन और शब गुज़ारी वगैरह में अदल-ओ-मुसावात बाक़ी रखे । हदी समुबारका में आता है जिस शख़्स के निकाह में दो औरतें हूँ और वो उन के हुक़ूक़ में बराबरी और इंसाफ़ ना कर सके तो वो क़यामत में इस तरह उठाया जाएगा कि इस का एक पहलू गिरा हुआ होगा ( यानी फ़ालिज ज़दा होगा ) ( मिशकात 278 ) नीज़ क़ुरआन क्रीम में है :

अगर तुम को इस का ख़ौफ़ हो कि अदल ना कर सको गे तो एक ही बीवी पर बस करो ( अलनिसा-) । इस से मालूम हुआ कि एक से ज़्यादा निकाह करना उसी सूरत में जायज़ है जब कि शरीयत के मुताबिक़ सब बीवीयों में बराबरी कर सके । अगर इस पर क़ुदरत ना हो तो एक ही बीवी रखे । नीज़ शरीयत की निगाह में निकाह एक पाकीज़ा और पाएदार रिश्ता है । इस्लाम चाहता है कि जो इस बंधन में बंधे वो हमेशा उसी पर क़ायम रहे ।

मामूली मामूली बातों की वजह से इस रिश्ता की मज़बूत बुनियादों को ना ढाएं । तलाक़ चूँ कि इसी रिश्ता को तोड़ने का नाम है इस लिए इस्लाम उसे पसंद नहीं करता । हदीस मुबारका से मालूम होता है कि शैतान को सब से ज़्यादा ख़ुशी इस से होती है कि मियां बीवी के दरमियान जुदाई करदी जाय । ( सहीह मुस्लिम ) नीज़ एक हदीस शरीफ़ में है कि अल्लाह ताला मज़ा चखने और एक औरत या मर्द की लज़्ज़त उठाकर इस से जुदाई इख़तियार करने वाले मर्दों और औरतों को पसंद नहीं करता ( मजमा अलज़वाइद ) । हुज़ूर का इरशाद है अल्लाह ताला ने जिन चीज़ों की इजाज़त दी है इन में सब से ज़्यादा ना पसंदीदा और काबिल-ए-नफ़रत चीज़ तलाक़ है । ( अबुदाउद ) । इस तरह इस नियत से निकाह करना कि चंद महीने बाद तलाक़ दीदी जाएगी ।

ये मक़ासिद शरीयत के ख़िलाफ़ है लिहाज़ा गुनाह अज़ीम का बाइस है । एक तरफ़ तो क़ुरआन-ओ-हदीस के इतने शदीद अहकामात हैं , दूसरी तरफ़ हमारे कुछ दौलतमनद हज़रात ने बनात हवा (ओरत)-खिलौना और बदन का लिबास बना रखा है कि जब चाहें इस्तिमाल करें और जब चाहें फेनक दें , शहवत रानी के लिए यके बाद दीगरे कई कई निकाह किये जाते हैं । अभी हाल ही में तरलगू अख़बारात में एक एसे ही शख़्स के मुआमला को ख़ूब उछाला गया । जिस ने अब तक 14 शादियां कर रखी थी , ये 55 साला एम हफ़ीज़ बैग बंजारा हिलज़ , ज़हरा नगर का बाशिंदा है । एक अर्सा तक सऊदी में मुलाज़मत के बाद अब हैदराबाद में मुक़ीम है ।

इस के ख़िलाफ़ उस की मुतल्लक़ा बीवी महमूदा बेगम ने बंजारा हिलज़ पुलिस इस्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई , जिस का F.I.R नंबर 2-29/2012 है । जिस के ख़िलाफ़ पुलिस ने 498(A) IPC के तहत मुक़द्दमा दर्ज कर के उसे अदालती तहवील में पेश कर दिया है । महमूदा बेगम के मुताबिक़ इस शख़्स ने अब तक 14 शादियां किया है जब कि फ़िलवक़्त इस के निकाह में सिर्फ दो बीवीयां हैं । महमूदा बेगम ने बताया कि चार माह कब्लइस ने चार बच्चों के साथ मुझे घर से निकाल दिया । मज़ीद इस ने बताया कि हमारी शादी 1992 में हुई थी । इस शख़्सने अचानक ख़ाली हाथ मुझे घर से बाहर कर दिया । महमूदा बेगम ने इस शख़्स की घिनाउनी हरकत से पर्दा उठाते हुए कहा कि ये सल्लम इलाक़ों की रहने वाली इंतिहाई गरीब लड़कियों से शादी करता है ।

ज़्यादा से ज़्यादा 6 महीने या एक साल रख कर तलाक़ दे देता है । चूँ कि ये मालदार आदमी है । इस लिये ये गरीब बच्चियां इस के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने को सोचती तक नहीं । महमूदा बेगम के भाई मुहम्मद अरशद मदनी ने बताया कि ये मेरी बहन को बुरी तरह ज़द-ओ-कोब (मार पीट) करता और इस के बाल पकड़ कर दीवार से इस का सर मारता था जिस से कई दफ़ा वो अपने होश-ओ-हवास खो बैठती , महमूदा बेगम के एक बेटे ने जो दसवीं जमात का तालिब-ए-इल्म है कहा कि मेरे वालिद ने स्कूल का बयाग मेरी तरफ़ फेंकते हुए कहा कि यहां से चला जा और कभी शक्ल तक ना दिखाना ।

महमूदा बेगम ने कई एक तलाक़ नामे दिखाते हुए कहा कि इस ने यास्मीन फ़ातिमा उर्फ़ इलियासी साबरा को 22 जनवरी 1992 में और शमीम सुलताना को 8 फरवरी 2005 में और अमीरख़ातून को 6 फरवरी 2007 में तलाक़ दी । वाज़ेह रहे कि एम हफ़ीज़ बैग एक करीबी मस्जिद की कमेटी का रुकन भी है । बंजारा हिलज़ पुलिस क़ाबिल मुबारकबाद है जिस ने महमूदा बेगम की शिकायत पर बरवक़्त कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ़्तार किया । क़ारईन ! आजकल ये ज़ुलम आम हो रहा है कि शहर के कुछ मालदार हज़रात अपनी शहवत पूरी करने के लिए गरीब बच्चियों से निकाह करते हैं और चंद महीने बाद उसे तलाक़ दे देते हैं ।

लड़की को देखते ही वालदैन के हाथों मोटी रक़म थमा देते हैं जिस से वो बेक़ाबू हो कर इस के साथ बच्ची की शादी कर देते हैं और इस का अंजाम नहीं सोचते ,शहवत परस्त मालदार लोग ये कह कर शादी करते हैं कि बीवी इंतिक़ाल कर गई । या बीमार रहती है । नाफ़रमान है या मैं औलाद से महरूम हूँ इस लिए दूसरी शादी करना चाहता हूँ , इस तरह के झूटे बहाने बनाकर गरीब लड़कियों से शादी करते हैं वगैरह वगैरह । नीज़ बवक़्त शादी मुआहिदा होता है कि लड़की को मैके के क़रीब ही किसी किराया के मकानात में रखा जाएगा और वो हफ़्ता में एक दो बार आया करेगा । चंद रोज़ कब्ल हाफ़िज़ बाबा नगर की लड़की की माँसाहब टैंक के रहने वाले एक शख़्स से इसी तरह की शादी हुई ।

लड़की की उम्र 20 और मौसूफ़ की तक़रीबा 50 साल होगी । लड़की के वालिद एक शादी ख़ाना में मामूली मुलाज़िम हैं , नौशा के साथ शादी में सिर्फ 4 दोस्त शरीक हुए । मालूम करने पर पता चला कि लड़की के घर से बिलकुल मुत्तसिल एक किराया के मकान में इस ने ज़रूरियात का तमाम सामान जैसे फ़रीज़ , टी वी , फर्नीचर वगैरह मुहय्या कर के वहीं लड़की को रखा और वालदैन से कहा कि मैं हफ़्ता में एक दो बार आया करूंगा । इसी तरह नवाब साहब कुंटे में साल गुज़श्ता गुलाब बानो नाम की एक लड़की ने कमरे में छत के पंखे से लटक कर ख़ुदकुशी करली । उस की शादी भी मज़कूरा बाला नौइयत की थी ।

तीन महीने कब्ल उस की शादी बंजारा हिलज़ के एक अमीर शख़्स से हुई थी इस ने भी शादी का मज़कूरा बाला बहाना बनाया था और ये भी बहुत कम आया जाया करता था । एक किराया के मकान में लड़की को रखा था मगर वो मुहल्ला के एक आवारा लड़के की जानिब से बार बार की हरासानी और छेड़खानी से परेशान आकर ख़ुदकुशी की मुर्तक़िब हुई । काबिल-ए-ज़िकर अमर ये है कि जनाज़े में इस का शौहर एक अजनबी की तरह शरीक हुआ ।

और बाद तदफ़ीन वो सारा सामान जो इस ने लड़की के लिए फ़राहम किया था और मज़ीद 10,000 रुपये लड़की के वालदैन के हवाले कर के एसा गया कि अब तक ना लौटा ।इस्लाह मुआशरा का बीड़ा उठाने वाली तनज़ीमों और अफ़राद से अपील है कि वो सल्लम इलाक़ों में जाकर इस हवाले से बेदारी मुहिम चलाएं और मसाजिद में भी एसे मौज़ू बनाएं । वालदैन को इस तरह के शातिर लोगों से चौकन्ना रहने की हिदायत दी जाय जो उन की बेटी की ज़िंदगी को तबाह-ओ-बर्बाद कर सकते हैं। नीज़ क़ाज़ी साहिबान से की भी ज़िम्मेदारी बनती है कि इस तरह के निकाह कराने से एहतियात बरतें ।।

* मेरे शौहर ने कई बार मेरे बाल पकड़ कर दीवार से मेरा सर मारा , जिस से मैं होश खो बैठती।

*वो इंतिहाई गरीब सल्लम इलाक़ों की लड़कियों से निकाह करता है ताकि बाद तलाक़ वो आवाज़ ना उठा सकें ।

*चंद अहल सरवत(अमीर) लोगों ने यके बाद दीगरे निकाह और तलाक़ को शहवत रानी का आसान रास्ता बना रखा है ।

* मुतअद्दिद मालदार हज़रात अपनी साबिक़ा बीवी की चंद खामियां जैसे नाफ़रमान , बांझ या बीमारी को बे बुनियाद बहाना बनाकर गरीब लड़कियों से निकाह करते हैं ।

* रिश्ता तै होते ही गरीब वालदैन को एक मोटी रक़म थमादी जाती है और बाद निकाह लड़की को मैके के करीब ही किसी किराया के मकान में रखा जाता है । और अपनी शनाख़्त इस से मख़फ़ी रखी जाती है ताकि लड़की घर ना पहुंच जाय।

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