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धोखाधडी करने वालों के काट दो हाथ: मद्रास हाईकोर्ट का तब्सिरा

मद्रास हाईकोर्ट के एक जज ने धोखाधडी के मामले में काफी सख्त तब्सिरा करते हुए मुल्ज़िमो के हाथ काट दिए जाने की बात कही है। उन्होंने इसके लिए सीरिया के कानून का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि हालांकि हमारे मुल्क में ऐसा कानून नहीं है। जस

मद्रास हाईकोर्ट के एक जज ने धोखाधडी के मामले में काफी सख्त तब्सिरा करते हुए मुल्ज़िमो के हाथ काट दिए जाने की बात कही है। उन्होंने इसके लिए सीरिया के कानून का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि हालांकि हमारे मुल्क में ऐसा कानून नहीं है। जस्टिस विद्यानाथन ने यह तब्सिरा प्रापर्टी के जाली कागजात बनाने के एक मामले की सुनवाई के दौरान की।

उन्होंने कहा कि यह बदकिस्मती है कि हमारे मुल्क में धोखाधडी या प्रापर्टी के जाली कागजात बनाने वाले मुजरिमो के हाथ या उंगलियां काट देने का कोई कानून नहीं है। अगर कानून कडे हों, तो मुजरिम ऐसी सरगर्मियों में मुलव्वस होने की हिम्मत नहीं करेंगे और सब रजिस्ट्रार ऑफिस के ऐसे आफीसरो के हाथ भी काट देने चाहिए, जो ऐसे मुजरिमों से मिले होते हैं और बेगुनाह लोगों की प्रापर्टी को लूटने या हडपने में उनकी मदद करते हैं।

जस्टिस विद्यानाथन ने कहा कि इस्लामिक ममालिक में छोटी सी चोरी के लिए भी हाथ और उंगलियां काट देने की सजा दी जाती है। मैंने एक मज़मून पढा था, जिसमें ईरान के कोर्ट ऑफ शिराज में एक खास तरह की मशीन लगाई गई है। इसका इस्तेमाल चोरी करने वालों के हाथ की उंगलियां काटने में किया जाता है। जालसाजी के लिए यह अदालत भी उंगलियां काट देने के इतने सख्त सज़ा से दरखास्तगुज़ार (मुजरिम) को एजाज देना चाहती है।

जस्टिस विद्यानाथन ने कुरआन का हवाला देते हुए इस काम को हराम भी बताया।

उन्होंने कहा कि पैगंबर ने ऐसे लोगों को चोर होने का लानत दिया है। ऐसे बदउनवान अनासिर समाज में हैं और अगर इन्हें छोड दिया गया तो वह अपने बदउनवानी करपशन से बेगुनाह लोगों को मुतास्सिर करेंगे और उम्माह (कौम) के जिस्म को मुतास्सिर करेंगे।

पीएम एलावरसन नाम के एक शख्स ने प्रापर्टी के एक मामले में कोर्ट में दरखास्त दाखिल की थी। उसने अदालत से मांग की थी कि उसकी प्रापर्टी के लिए रजिस्ट्रेशन नं० अलाट करने और दस्तावेज जारी करने के लिए कोर्ट सैदापेट जिला रजिस्ट्रेशन और वीरूगमबक्कम सब रजिस्ट्रार को हिदायत दे।

गौरतलब है कि आफीसरों ने ऐलावरसन पर प्रापर्टी से जुडे कागजात के साथ फर्जीवाडा करने का इल्ज़ाम लगाते हुए कागजात जब्त कर लिए थे। आफीसरों का कहना है कि यह प्रापर्टी वीवीवी नचियप्पन नाम के किसी शख्स की है। ऐलावरसन के वकील ने इस पर ऐतराज़ जताया था और कहा था कि आफीसरों के पास प्रापर्टी के मिल्कियत की जांच की ताकत नहीं है और वे रजिस्टर्ड दस्तावेजों को लौटाने के लिए पाबंद हैं।

जस्टिस विद्यानाथन ने ऐलावरसन की इस मांग को खारिज कर दिया और कहा कि यह सीधे तौर पर इम्लाक ( प्रापर्टी) हडपने का मामला है। कोर्ट ने इस बात पर भी हैरत जताया कि कैसे ऐलावरसन ने जालसाजी और धोखाधडी को अंजाम देने के बावजूद अदालत का दरवाजा खटखटाकर हौसला दिखाया है।

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