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नकदी की कमी से ग्रामीण जनता पुराने विनिमय प्रणाली अपनाने पर मजबूर

बूंदी: नकदी की किल्लत से परेशान गांव बूंदी की जनता जहां एटीएम और बैंक शाखाएं नहीं हैं बुरी तरह प्रभावित हैं और वे सदियों पुराने विनिमय प्रणाली अपनाने पर मजबूर हो गए हैं वह अपनी गेहूं और दालों के बदले किराना आइटम प्राप्त कर रहे हैं। ग्रामीण जनता व्यावहारिक दृष्टि से पुराने दौर में पहुंच चुके हैं।

गेहूं वर्तमान में 21 ता 24 रुपये प्रति किलोग्राम गांवों में बिक रहा है लेकिन ग्रामीण बदले में किराना सामान पाने की वजह से नुकसान का शिकार हो रहे हैं। प्रधानमंत्री ने जोर तरीके से डिजिटल अर्थव्यवस्था और नकदी के बिना लेनदेन पर जोर दिया है लेकिन अधिकांश ग्रामीण जनता नहीं जानते कि इन तीनों शब्दों का मतलब क्या है।

अच्छे दिन तो कभी नहीं आए लेकिन पुराने दिन वापस आ गए हैं। अच्छे दिन अब मजाक का विषय बन गए हैं। पिछले कुछ हफ्तों से मैं गेहूं बदला सलाद और दैनिक जरूरत की वस्तुओं को किराना की दुकान से प्राप्त कर रहा हूँ। बूंदी के करीब गांवों गणेश पुरा के किसान शियोगराम मीना ने इसका खुलासा किया।

इसी गांव के एक अन्य किसान मौली ने कहा किराना वस्तुओं की खरीद गांवों की दुकानों से गेहूं के बदले में खरीदी जा रही है। उन्हें किलोग्राम के हिसाब से तौल कर दिया जाता है। अकाल के दिनों में कुछ साल पहले गांवों के स्थानीय लोगों ने यही प्रक्रिया अपनाई थी। वह पुराने दिन याद करते हुए यह बात कही। दो और किसानों ने जो इस जिले का एक पंचायत  हैं ‘भरोलत गुजर और मेवा लाल ने कहा कि हमारे पक्षों के 1400 लोगों की आबादी जल्द ही ग्रामीण जनता के पास नकदी की देहात जरखोड़ा के एटीएम में मौजूदगी से परिचित हो गए जो 12 किलोमीटर की दूरी पर हैं लेकिन वहां पहुंचने पर नकदी नहीं मिलने से निराश हो गए।

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