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नकाबपोश IB के लोगों ने लगाया था राष्ट्रविरोधी नारा: JNU प्रोफ़ेसर

नई दिल्ली: जेएनयू की प्रोफेसर जयति घोष ने यूनिवर्सिटी  में 9 फरवरी को हुई हादसे को केंद्र की एक साजिश करार देते हुए कहा है कि इस साजिश की योजना बड़े स्तर पर बनाई गई थी। उन्होंने ये भी इलज़ाम लगाया है कि उन्हें शक है कि चेहरे पर नकाब पहने जिन लोगों ने राष्ट्रविरोधी नारे लगाए थे वो आईबी से थे।बता दें कि जेएनयू में राष्ट्रवाद मुद्दे पर शनिवार को एक चर्चा हुई थी जिसमें जयति ने भी हिस्सा लिया था। उन्होंने सरकार पर इलज़ाम लगाए कि केंद्र जेएनयू को जबरन निशाना बना रही है, क्योंकि यह छात्रों से डरी हुई है जो विचार कर सकते हैं।जयति ने चर्चा के दौरान कहा कि, जेएनयू वाले जितना सोचते हैं उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रविरोधी शब्द पर चर्चा नई नहीं है बल्कि ये कई वर्षों से चल रही है। वो बोली दूसरा अभिव्यक्ति, विचार और धार्मिक विचार की आजादी और कई अन्य बातें भी इसमें शामिल हैं। तीसरी, दर्जे और अवसर की समानता। चौथा भाईचारा भी राष्ट्र की परिभाषा में ही शामिल है।

उन्होंने कहा कि पिछले कई सालों से सरकारें, अपने राजनीतिक विरोधियों पर कार्रवाई करने के लिए राष्ट्रविरोधी शब्द का इस्तेमाल करती हैं।जयति ने ये भी कहा कि संविधान के अनुसार राष्ट्र को जिस तरह परिभाषित किया गया है उसका मतलब सिर्फ संप्रभुता, धर्मनिरपेक्षता, लोकतांत्रिक भारतीय गणराज्य नहीं है, बल्कि संविधान सामाजिक न्याय, अर्थव्यवस्था और राजनीति की भी बात करना है।

एक न्यूज़ पोर्टल के अनुसार जयति घोष ने कहा कि हमें निशाना बनाया जा रहा है जिसके कारण हमें अपना बचाव करना पड़ रहा है। जेएनयू में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर ने राष्ट्रविरोध के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की और कहा कि यह सरकारी नीतियां हैं जो राष्ट्रविरोधी हैं न कि न जनता। एक व्यक्ति कभी राष्ट्रविरोधी नहीं हो सकता, यह सरकार की नीतियां होती हैं जो राष्ट्रविरोधी हो सकती हैं। जयति ने कहा कि पिछले 30 सालों से सरकार की आर्थिक नीतियां जनता विरोधी हैं और अब बजट में ईपीएफ पर 60 प्रतिशत टैक्स का फैसला बेहद कठोर है।सरकार अपनी इस नीति से लोगों को अस्थिर बाजार में निवेश करने के लिए मजबूर कर रही है।

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