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नजीब: अब लोकतंत्र में प्रदर्शन की इजाज़त भी नहीं

मुहम्मद ज़ाकिर रियाज़, नई दिल्ली: रविवार, 6 नवम्बर को नजीब को लापता हुए 23 दिन हो गए हैं | लेकिन उसका अभी तक पता नहीं है | केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाली दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की है | साथ ही दिल्ली पुलिस यह भी नहीं चाहती की नजीब के परिजन, साथी छात्र और आम जन इस मामले में किसी मांग को लेकर कोई विरोध प्रदर्शन करें | इसकी एक बानगी रविवार को दिल्ली में देखने को मिली |

रविवार, 6 नवम्बर 2016 को नजीब के लिए सैकड़ों छात्र और दिल्ली वासियों ने इंडिया गेट पर एक संयुक्त नागरिक विरोध प्रदर्शन का इरादा किया था | लेकिन दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन को रोकने में एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया | दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट क्षेत्र में धारा 144 लगाते हुए इंडिया गेट की तरफ जाने वाले सभी रास्तों को बंद कर दिया | इन रास्तों पर भारी बेरिकेडिंग की गयी और बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया | प्रदर्शन को न होने देने के आदेश के पालन की इन्तहा यह थी कि इन इलाकों में काम करने वाले लोगों को बिना आई-कार्ड चेक किये जाने नहीं दिया जा रहा था |

 

फोटो: मुहम्मद ज़ाकिर रियाज़
फोटो: मुहम्मद ज़ाकिर रियाज़

प्रदर्शन में हिस्सा लेने आ रहे जेएनयू, डीयू और जामिया के छात्रों को प्रदर्शन स्थल पर पहुँचने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया | जेएनयू के छात्रों की बस को जंतर मंतर पर प्रदर्शन शुरू करने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया | इन छात्रों के साथ पहुंची नजीब की माँ के साथ भी दिल्ली पुलिस ने बर्बरता की हद्द की | पहले से ही दुखों के पहाड़ से दबी माँ को दिल्ली पुलिस ने लगभग सड़क पर घसीटते हुए बस में चढ़ाया | दूसरी तरफ जामिया मिल्लिया इस्लामिया से आ रही छात्रों की बस को पुलिस ने मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन के पास हिरासत में ले लिया |

 

फोटो: अज़हर अमीन
फोटो: अज़हर अमीन

 

आमतौर पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के बाद पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने ले जाया जाता है | लेकिन आज सरकारी तंत्र के अन्दर इस प्रदर्शन के खौफ का आलम यह था कि हिरासत में लिए गए छात्रों को अलग अलग थाने ले जाया गया | नजीब की माँ को कुछ छात्रों के साथ माया पुरी थाने, नजीब की बहन और अन्य जेएनयू छात्रों को मंदिर मार्ग थाने और जामिया के छात्रों की बस को सी. आर. पार्क थाने ले जाया गया | पुलिस के द्वारा प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग थानों में ले जाना, प्रदर्शन के होने की संभावना ख़त्म करने की रणनीति थी |

छात्रों ने हिरासत में लेने के दौरान पुलिस पर हिंसा और बर्बरता का भी आरोप लगाया | जेएनयू की एक छात्रा ने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा, “जैसे ही हम सभी छात्र नेशनल आर्काइव्ज बस स्टैंड के पास इकठ्ठा हुए तभी वहां पुलिस वाले 4-5 बस लेकर पहुंचे | उन्होंने हमें जबरदस्ती बस में सवार करना शुरू कर दिया | पुलिस ने छात्रों के साथ हाथापाई भी की और नजीब की माँ को सड़क पर घसीटा भी गया | कई महिला छात्राओं के साथ पुरुष पुलिस वालों ने भी खींचा-तानी की | यह बेहद दुखदाई था |”

जामिया की छात्रा ध्रुपदी घोष बताती हैं, “हम जामिया के लगभग 120 छात्रों को जबरदस्ती मंडी हाउस से हिरासत में ले लिया गया | हम इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए चिड़ियाघर से मंडी हाउस तक पैदल गए थे | वहां से पुलिस ने हमें हिरासत में लिया और हमें बस में घुमाती रही | लगभग डेढ़ घंटे बाद पुलिस ने हमें सी. आर. पार्क थाने छोड़ा | पुलिस द्वारा अलग-अलग जगह से छात्रों को हिरासत में लेना पुलिस की छात्रों के प्रदर्शन को तोड़ने की नयी रणनीति थी |”

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