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नफरत का बढ़ता रुझान मुल्क के लिए तशवीशनाक : रिजवान अहमद इसलाही

पटना 14 फरवरी : जमायते इस्लामी हिन्द हल्का बिहार के कायम मुकाम अमीर हल्का रिजवान अहमद इसलाही ने अपने एक बयान में कहा के इस वक़्त मुल्क और रियासत में नफरत का माहौल है, तासीब को फरोग दिया जा रहा है, कल तक इसका दायरा महदूद था, दिन ब दीन इस का

पटना 14 फरवरी : जमायते इस्लामी हिन्द हल्का बिहार के कायम मुकाम अमीर हल्का रिजवान अहमद इसलाही ने अपने एक बयान में कहा के इस वक़्त मुल्क और रियासत में नफरत का माहौल है, तासीब को फरोग दिया जा रहा है, कल तक इसका दायरा महदूद था, दिन ब दीन इस का दायरा बाढ़ रहा है। शुरू में आम मुस्लिम नौजवान तासीब का शिकार हो रहे थे, अब तो नफरत और तासीब का आलम ये है के रियासत के मुस्लिम वज़ीर पर साफ-साफ दहशत गर्दी का इल्ज़ाम थोप दिया गया है। उन्होने कहा के शहीद अली खान रियासती सरकार में एक अहम वज़ारत के ओहदे पर फ़ायज हैं, उनपर किसी तरह का कोई इल्ज़ाम यकीनन एक तशवीश की बात है, इस इल्ज़ाम के पीछे सरकार बदनाम करने की जो सियासी कोशिश की गयी है, इससे ज़्यादा तशवीश की बात ये है के शाहिद अली खान मुस्लिम मिल्लत का एक फर्द है, इस तरह ये पूरे मुस्लिम कॉमयूनिटी पर माज़ी में मुस्लिम नौजवनों के हवाले से लगाए गए बदनुमा धब्बे को मजीद तकवीत पहुंचाना है, यकीनन ये मुसलमानो के जब अलूतनि पर एक सवालिया निशान लगाने की एक मजमुम हरकत है, इस लिए इस वाक़ेय की तहक़ीक होनी चाहिए।

इस मजमुम हरकत को अंजाम देने में जो सरकारी वगैरह सरकारी एजेंसियाँ मौलूस हैं, उन सब को काठहरे में खड़ा करके केफर किरदार तक पहुंचाना चाहिए। उन्होने रियासती सरकार से मुतालिबा किया है के इस संगीन इल्ज़ाम को एक सियासी खेल या सियासी हरबा कह कर नज़र अंदाज़ नहीं कर देना चाहिए बल्कि इस जुर्म के मर तकबीन को होश का नाखून देने के लिए फौरी और अमल एकदाम करना चाहिए क्योंकी सियासी हरबा या वोट बैंक की सियासत के लिए किसी मिल्लत को मुसलसल और बिला तफ़रीक़ बदनाम करना सियासत नहीं सरासर मिल्लत का इस्तहसाल है। जिसे मुस्लिम मिल्लत कभी बरदास्त नहीं कर सकती है।

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