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नमाज़ , नबी (स०) की मुहब्बत का ज़रिया

नमाज़ बंदे को नूर-ओ-रहनुमाई अता करती है। नबी(स०) रहमते सलाम की मुहब्बत का इज़हार नमाज़ की अदायगी है।

नमाज़ बंदे को नूर-ओ-रहनुमाई अता करती है। नबी(स०) रहमते सलाम की मुहब्बत का इज़हार नमाज़ की अदायगी है।

दिलों को सुकून‍ ओ‍ इतेमीनान वक़्त पर नमाज़ अदा करने से होता है। इन ख़्यालात का इज़हार मौलाना मुफ़्ती सादिक़ मुही उद्दीन फ़हीम ने जलसा अज़मत मुस्तफ़ा(स०) से किया।

सरपरस्त जलसा मौलाना मुहम्मद इदरीस अहमद कादरी सज्जादा नशीन आस्ताना क़ादरिया ने कहा कि नमाज़ का इनकार करना कुफ्र है। इस जलसे से मौलाना सय्यद अबदुर्रहमान हुस्न कादरी ने कहा कि कसरत दरूद से बंदा गुनाहों से बचता है और इबादतों की तरफ़ राग़िब होता है और अज़मते रसुल(स०) सुनने से ईमान को हरारत मिलती है और क़लब में ताज़गी पैदा होती है।

मौलाना मुहम्मद अबदुलहमीद रहमानी सदर कुल हिंद तंज़ीम इस्लाह मुआशरा ने कहा कि प्ंज वक्ता नमाज़ के ज़रीये अल्लाह ने मुसलमानों को अपना मुहासिबा करने का मौक़ा इनायत फ़रमाया और बाजमाअत नमाज़ पढ़ते हुए एक दूसरे की ख़ैरीयत दरयाफ़त करते हुए दूसरों की मदद करने को अल्लाह ने पसंद किया।

अल्लाह उन लोगों को पसंद करता है जो आपस में एक दूसरे की मदद करते हैं। जलसे का आग़ाज़ हाफ़िज़-ओ-क़ारी शाह नवाज़ी कादरी की किरा॔ते कलाम पाक से हुआ।

इस मौके पर आलमी तहफ़्फ़ुज़ इंसानी हुक़ूक़ तंज़ीम की तरफ से क़ौमी सतह पर बेहतरीन अवामी ख़िदमात और सूफ़ी अज़म को फ़रोग़ देने पर मौलाना मुहम्मद इदरीस अहमद कादरी को ऐवार्ड से नवाज़ा गया। इस ऐवार्ड को फ़ैज़ उद्दीन अशर्फ़ी, मुफ़्ती सादिक़ मुही उद्दीन ने तौसीफ नामा पेश किया।

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