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नरेंद्र मोदी को आरयूसी अध्यक्ष की टिप्पणी, अपने घर से करे महिला अधिकार की शुरुआत

तीन तलाक़ के मुद्दे पर लगातार बहस चल रही है और यह मुद्दा विवादस्पद बना हुआ है। इस मुद्दे पर आजमगढ़ की रहने वाली उलेमा काउंसिल ऑफ इण्डिया की महिला विंग अध्यक्ष रिजवाना खातून ने केन्द्र सरकार के खिलाफ बयान दिया है। रिजवाना ने बयान ज़ारी किया है की तीन तलाक और शादी वगैरह मुसलमानों के निजी और मजहबी अधिकार हैं।

मुसलमान संविधान में मिले धार्मिक अधिकार के तहत अपने धर्म के अनुसार ही शादी और तलाक वगैरह नियमों का पालन करेंगे। भारतीय संविधान हमें बिना किसी दबाव के अपने धर्म का पालन करने की आजादी देता है। मुस्लिम महिलाएं इस आजादी में किसी भी सरकार या संगठन का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगी।

उन्होंने अपने बयान में कहा है कि शरीयत खुद तीन तलाक को गुनाह ए कबीरा करार देती है और सख्त नापसन्द करती है। लेकिन तलाक मसले का हल भी इस्लाम ने दे रखा है। अगर इसका हल तलाशना है तो इस्लाम और शरीयत में ही तलाशना होगा, न कि अदालत और संसद में।

रिजवाना ने इसको लेकर पीएम नरेन्द्र मोदी को भी नसीहत दे डाली है। उन्होंने कहा है कि पीएम मोदी जी अगर सच में महिलाओं के अधिकारों के लिए इस कदर फिक्रमन्द हैं तो पहले इसकी शुरुआत अपने घर से करें। इसके बाद वह दूसरों के घर मे झांके।

आपको बता दें की केंद्र सरकार द्वारा तीन तलाक़ के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट को एक हलफनामा दिया गया था जिसपर मीडिया से लेकर देश के कई हिस्सों में बड़ी बहस छिड़ गयी। इसी के साथ यूपी के महोबा में मंच से पीएम नरेन्द्र मोदी का इस पर एक कदम और आगे बढ़कर बयान देना चुनावी काल में इस मुद्दे को और बड़ा बना रहा है।

हालांकि कई मुस्लिम महिलाओं और मुस्लिम संगठनों ने आगे आकर केन्द्र के फैसले का स्वागत किया है, पर मुस्लिम महिलाओं और खास तौर से पड़ी लिखी महिलाओं की ओर से इसके विरोध में भी लगातार आवाज बुलन्द की जा रही है।

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