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नवाज शरीफ को इस्लामाबाद पर कब्जा करने की मिली धमकी

इस्लामाबाद : इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने नवाज शरीफ पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए ‘इस्लामाबाद पर कब्जा’ करने की धमकी दी है। शरीफ परिवार का नाम पनामा लीक्स में सामने आने के बाद से ही उनके ऊपर हवाला के आरोप लग रहे हैं। अब दीफा-ए-पाकिस्तान नाम के एक धार्मिक व राजनैतिक संगठन ने जम्मू-कश्मीर में ‘भारतीय अत्याचारों’ के खिलाफ राजधानी इस्लामाबाद में रैली आयोजित करने का फैसला किया है। कुल मिलाकर, नवाज ना केवल भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कथित नजदीकी और कश्मीर मुद्दे को लेकर, बल्कि भ्रष्टाचार के कारण भी बड़ी मुश्किलों में फंसते हुए नजर आ रहे हैं। बिलावल भुट्टो द्वारा नवाज पर कसा गया तंज, ‘मोदी का जो यार है, गद्दार है गद्दार है’, को भी इन दिनों पाकिस्तानी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया बार-बार अपने कार्यक्रमों में इस्तेमाल कर रही है। नवाज पर संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान का पक्ष मजबूती से ना रख पाने का भी आरोप लग रहा है।

दीफा-ए-पाकिस्तान ने 27 और 28 अक्टूबर को इस्लामाबाद और मुजफ्फराबाद में रैलियां आयोजित करने की घोषणा की है। मालूम हो कि दीफा-ए-पाकिस्तान का सीधा संबंध हाफिज सईद और उसके आतंकी संगठन जमात-उद-दावा से है। दीफा-ए-पाकिस्तान की रैली इसलिए भी अहम होगी क्योंकि पाकिस्तान में आतंकी संगठनों द्वारा किए जाने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों और गतिविधियों को लेकर काफी विवाद खड़ा हो गया है। इसके बावजूद अगर यह रैली होती है, तो पाकिस्तानी सत्ता की मुश्किलें काफी बढ़ जाएंगी।

जमात-उद-दावा के प्रवक्ता आशिफ खुर्शिद ने दीफा-ए-पाकिस्तान की रैली के कार्यक्रम की पुष्टि की है। एक स्थानीय अखबार में छपी खबर के मुताबिक खुर्शिद ने कहा, ‘रैली से एक हफ्ते पहले हम इस्लामाबाद जिला प्रशासन से रैली आयोजित करने की आधिकारिक अनुमति लेंगे। उसने यह भी कहा कि दीफा-ए-पाकिस्तान को रैली रद्द होने या फिर स्थगित किए जाने के बारे में सरकार की ओर से कोई निर्देश नहीं मिला है। दीफा-ए-पाकिस्तानका दावा है कि वह बाहरी खतरों से अपने मुल्क की हिफाजत करने के लिए काम कर रहा है।दीफा-ए-पाकिस्तान का सदस्य और अहले सुन्नत वल जमात का प्रमुख मौलाना अहमद लुधियानवी ने मीडिया से कहा कि वे लोग हमेशा ‘पाकिस्तान की संप्रभुता कायम रखने’ में लगे रहेंगे। रैली का बचाव करते हुए उसने कहा, ‘देश की संप्रभुता की हिफाजत करना अपराध नहीं है।’

लुधियानवी के अनुसार, अमरीकी नौसेना ने अल-कायदा के आतंकी सरगना ओसामा बिन लादेन के खिलाफ 2011 में किए गए ऑपरेशन के लिए पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन किया। 2011 में ही खैबर इलाके में पाकिस्तानी सेना की एक पोस्ट पर नाटो द्वारा किए गए हमले में 24 सैनिक मारे गए। लुधियानवी ने कहा, ‘जब देश के सामने बाहरी लोगों से खतरा पैदा हो जाता है, तब धार्मिक संगठन सेना के साथ खड़े होते हैं।’ मालूम हो कि हाफिज सईद का संगठन जमात-उद-दावा भी खुद को धार्मिक संगठन ही बताता है।

स्रोत : पत्रिका डॉट कॉम

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