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नागपुर मेट्रो रेल प्रोजेक्ट की जानिब मुसबत पेशरफ़त

महाराष्ट्रा के नागपुर और पुने में एहमीयत के हामिल समझे जाने वाले मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के ख़ाब को शर्मिंदा ताबीर करने की कोशिश को इस वक़्त तक़वियत (तसल्ली) हासिल हुई जब रियास्ती हुकूमत ( राज्य सरकार) ने अर्बन ट्रांसपोर्ट निज़ाम के लिए

महाराष्ट्रा के नागपुर और पुने में एहमीयत के हामिल समझे जाने वाले मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के ख़ाब को शर्मिंदा ताबीर करने की कोशिश को इस वक़्त तक़वियत (तसल्ली) हासिल हुई जब रियास्ती हुकूमत ( राज्य सरकार) ने अर्बन ट्रांसपोर्ट निज़ाम के लिए इंतिज़ामी तौर पर उस की मंज़ूरी दे दी ।

यहां इस बात का तज़किरा ज़रूरी है कि मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के लिए यहां तक़रीबन दस साल क़बल ( पहले) एक तकनीकी सर्वे किया गया था ।नागपुर इंप्रूव्मेंट ट्रस्ट (NIT) की जानिब से सर्वे मशहूर कंपनी लार्सन ऐंड टरबो ( L&T) ने अंजाम दिया था जो 70 से 90 किलो मीटर रूट के लिए किया गया था ।

अब रियास्ती हुकूमत ने प्रोजेक्ट के सिलसिला में मुशावरत (विचार विमर्श) के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन की ख़िदमात हासिल की हैं जो जारीया साल अगस्त तक प्रोजेक्ट की एक तफ़सीली रिपोर्ट तैयार करेगी । इस प्रोजेक्ट की तकमील के लिए NIT नूडल एजेंसी है लेकिन अब तक क़ियादत और ब्यूरोक्रेसी के माबैन मुशावरत का सिलसिला शुरू नहीं हुआ है क्योंकि टेक्नोक्रेट्स के साथ भी ख़द-ओ-ख़ाल साइज़ और बुलंदी से मुताल्लिक़ इलावा अज़ीं रूट और दीगर ( अन्य/ दूसरे) मुतफ़र्रिक़ात पर बातचीत हनूज़ बाक़ी है ।

यहां इस बात का तज़किरा भी ज़रूरी है कि मुजव्वज़ा प्रोजेक्ट पर सिटी कांग्रेस एम पी विलास मोतीमवार और दीगर क़ाइदीन ( लीडर) बिशमोल महाराष्ट्रा के वज़ीर बराए ग़िज़ा-ओ-सियोल स्पलाईज़ ने मुतज़ाद ब्यानात दीए हैं ।

मोतीमवार का मुतालिबा है कि NIT को मुख़्तलिफ़ पहलोओं पर सेमीनार का इनइक़ाद (आयोजन) करना चाहीए ताकी ख़ुसूसी तौर पर नागपुर के अवाम और आम तौर पर तमाम मुसाफ़िरैन के मुफ़ाद में कोई ठोस फ़ैसला किया जा सके । अपने एक मकतूब में NIT सदर नशीन प्रवीण दराड़े को उन्होंने ये कह कर बावर ( यकीन/ भरोसा) कराने की कोशिश की कि वो ख़ुद (विलास) ज़र-ए-ज़मीन मेट्रो रेल की हिमायत करते हैं क्योंकि इसके ज़रीया आराज़ीयात के हुसूल की सिरे से ज़रूरत ही पेश नहीं आएगी।

आंधरा प्रदेश में भी इस वक़्त शहर हैदराबाद में मेट्रो प्रोजेक्ट का आग़ाज़ हो चुका है जिसके लिए कई क़दीम इमारतों का इन्हिदाम (गिरना) अमल में आया है ताकि आराज़ीयात हासिल की जा सकें । माहिरीन इसीलिए ज़र-ए-ज़मीन मेट्रो की ताईद करते हैं क्योंकि इस से आराज़ीयात का तनाज़ा ( झगड़ा) पैदा नहीं होता ।

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