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नाबालिग़ मुल्ज़िमीन की उम्र 18 साल से 16 साल नहीं की जा सकती: जस्टिस वर्मा

नई दिल्ली, 25 जनवरी( एजेंसी) जस्टिस जे एस वर्मा कमेटी जो दरअसल इस्मतरेज़ि क़वानीन पर नज़रसानी के लिए तशकील दी गई है ने इस्मतरेज़ि के मुआमलात में मुलव्वस नाबालिग़ लड़कों की उम्र 18 से 16 साल करदेने की तजवीज़ को मुस्तर्द कर दिया है।

नई दिल्ली, 25 जनवरी( एजेंसी) जस्टिस जे एस वर्मा कमेटी जो दरअसल इस्मतरेज़ि क़वानीन पर नज़रसानी के लिए तशकील दी गई है ने इस्मतरेज़ि के मुआमलात में मुलव्वस नाबालिग़ लड़कों की उम्र 18 से 16 साल करदेने की तजवीज़ को मुस्तर्द कर दिया है।

मर्कज़ी वज़ारत-ए-दाख़िला को अपनी रिपोर्ट पेश करने के बाद एक प्रेस कान्फ्रेंस से ख़िताब करते हुए उन्होंने कहा कि मुल्क में बच्चों की जेलों की हालत इंतिहाई ख़स्ता है। अपनी रिपोर्ट में कमेटी ने वाज़िह किया है कि बच्चों की जेलों को जिस तरह चलाया जाना चाहीए उन्हें चलाने के लिए जो जज़बा कारफ़रमा होना चाहिए इसका कहीं दूर दूर तक पता नहीं है ।

लिहाज़ा ज़रूरत इस बात की है कि मर्कज़ी हुकूमतों के इलावा रियासती हुकूमतें भी फ़लाही कमेटियां जो वीनाइल बोर्डस और बच्चों की जेल में दरकार सहूलतों और दीगर इनफ़रास्ट्रक्चर के लिए तशकील दें बच्चों की जेल में ऐसे बच्चों को लाया जाता है जिनका बचपन में इस्तेहसाल किया जाता है कई बच्चे यतीम होते हैं कई बच्चे गदागर होते हैं किसी के साथ जिन्सी ज़ियादती की जाती है और कोई बेघर होता है ।

इन सब का आसरा यही बच्चों की जेलें होती हैं जिन्हें जो वीनाइल होम्स भी कहा जाता है । इन जेलों में ग़िज़ा कौंसलिंग और साईको थीरापी के मयार को बेहतर बनाए जाने की भी ज़रूरत है ताकि ज़िंदगी के मुख़्तलिफ़ शोबों में महरूम रह जाने वाले बच्चों के एहसास महरूमियत को दूर किया जा सके ।

जस्टिस वर्मा के मुताबिक़ ऐसे कई बच्चे हैं जो बंधवा मज़दूर में तबदील हो चुके हैं । याद रहे कि जो वीनाइल होम्स के ख़स्ता और नाक़िस हालात उस वक़्त मंज़रे आम पर आए जब 16 दिसंबर को दिल्ली में इजतिमाई इस्मतरेज़ि के एक मुल्ज़िम ने इद्दिआ किया था कि क़ानूनी तौर पर वो नाबालिग़ है क्योंकि अब तक वो 18साल का नहीं हुआ है ।

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