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नारद की हाथी सबसे भारी, प्रशंसको ने कहा क्यों पड़े हो चक्कर में, कोई नहीं है टक्कर में

शम्स तबरेज़, सियासत न्यूज़ ब्यूरो, लखनऊ।
बलिया: उत्तर प्रदेश में बलिया क्रांतिभूमि के नाम से जानी जाती है। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में सैनिक विद्रोह करने वाले मंगल पाण्डेय की जन्मभूमि बलिया है।
बलिया कई ​मामलों में एतिहासिक है। फिलहाल उत्तर प्रदेश का चुनावी माहौल उरूच पर है बलिया में दो महत्वपूर्ण सीटे ​फेफना और बलिया सदर विधानसभा सींटे है जहां फेफना से सपा का दामन छोड़कर बसपा में शामिल हुए अम्बिका चौधरी ने ताल ठोक रखा है वहीं कभी साईकल की सवारी करने वाले पूर्व खेल मंत्री नारद राय ने भी बसपा के टिकट पर बलिया सदर से दावेदारी पेश की है। नारद राय बलिया सदर सीट से 3 बार विधायक रह चुके हैं।
आज सियासत की टीम ने बलिया ज़िले का रूख किया है और नारद राय बलिया में एक कद्दावर नेता के रूप में जाने जाते हैं। नारद राय ने अपने कार्यकाल में यूपी और बिहार को जोड़ने वाले पुल का निर्माण कराया, जिसे एशिया का सबसे लंबा पुल माना जा रहा है। नारद राय ने बलिया में ही एक स्पोर्ट्स कालेज का निर्माण कराया और सड़क को छोड़कर बाकी मामलों में ​नारद के विकास देखा जा सकता है। बलिया सदर सीट से इस बार नारद को चुनौती देने के लिए सपा से लक्ष्मण गुप्ता तैयार है, जबकि भाजपा से अनन्त शुक्ला नारद के सामने टक्कर देने के ​लिए खड़े है। सपा और भाजपा के दोनो ही प्रत्याशी पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं जिसमें से लक्ष्मण गुप्ता पूर्व चेयरमैन रह चुके है। जबकि अनन्त शुक्ला का पुराना राजनैतिक भूमिका नहीं है। बलिया सदर में 4 मार्च को मतदान होना है और नारद इस समय जनसंपर्क में व्यस्त है। अब देखना होगा कि चुनाव में मतदाता नारद राय के विकास को कितना स्वीकार करते हैं।

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