Wednesday , May 24 2017
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निजी एजेंसियों से आधार डेटा जमा कराने का आइडिया ठीक नहीं- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी गुरुवार को आधार कार्ड से जुड़े कुछ मामलों की सुनवाई करते हुए यह कहा है कि निजी एजेंसियों द्वारा आधार डेटा जमा करना कोई अच्छा आइडिया नहीं है। यह बात मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर की अध्यक्षता में बनाई गई बेंच ने कही जब आधार के डेटा को निजी कंपनियों द्वारा जमा किए जाने के एक केस में वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि इस मामले पर तुरंत सुनवाई की जरूरत है। इस बेंच में मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर के अलावा जस्टिस एन वी रमाना और जस्टिस डी वाय चंद्रचूढ़ भी थे।

एक याचिकाकर्ता की तरफ से दलील पेश करते हुए वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि इस मामले पर तुरंत सुनवाई की जानी चाहिए, क्योंकि यह किसी व्यक्ति सुरक्षा से जुड़ा मामला है। दीवान ने कहा कि लोगों का आधार डेटा निजी एजेंसियों द्वारा एकत्र किया जा रहा है। मामले पर जल्द सुनवाई की मांग करते हुए कहा गया है कि आधार कार्ड के जरिए सरकार लोगों की गतिविधियों पर नजर रख रही है, जो कि निजता (राइट टू प्राइवेसी) के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

आपको बता दें कि 15 अक्टूबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को स्वैच्छिक रूप से मनेगा, पीएफ, पेंशन और जनधन खातों से लिंक करने की इजाजत दे दी थी, लेकिन यह साफ कर दिया था कि इसे अनिवार्य नहीं किया जाएगा।

11 अगस्त 2015 को आधार कार्ड की अनिवार्यता प्रतिबंधित करने से हो रही परेशानी को लेकर आरबीआई, सेबी और गुजरात सरकार ने गुहार लगाई थी, जिसके बाद एक तीन न्यायाधीशों की बेंच ने मामला संवैधानिक पीठ के समक्ष भेज दिया था।

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