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निठारी कांड: 7वें मामले में भी सुरेन्द्र कोली को सजा-ए-मौत

गाजि‍याबाद: नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड से जुड़े सातवें मामले में सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने आज आरोपी सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई है. यह 7वां मामला है, जि‍समें उसे फांसी की सजा सुनाई गई है. कड़ी सुरक्षा के बीच आरोपी सुरेंद्र कोली को कोर्ट में पेश किया गया.

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प्रदेश 18 के अनुसार, सुरेंद्र कोहली पर 19 बच्चों पर हत्या और रेप का आरोप है. जिसके बाद पुलिस ने 6 मामलों में मनिंदर सिंह पंधेर को रेप और हत्या का आरोपी बनाया था. इससे पहले निचली अदालत ने सुरेंद्र कोहली और मनिंदर सिंह पंधेर को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने पंधेर को बरी कर सुरेंद्र कोहली की सजा बरकरार रखी थी.
आप को बता दें कि 20 जून, 2005 को 8 साल की एक बच्ची ज्योति खेलने के लिए निठारी की पानी टंकी के पास गई थी. इसके बाद से वह घर नहीं लौटी. ज्योति के परिजन ने उसे काफी ढूंढा, लेकिन कोई खबर नहीं मिली.
इसके कुछ दिनों बाद ही 6 साल का बच्चा हर्ष भी पानी की टंकी के पास से गायब हो गया. उसका भी कुछ पता नहीं चला. इस तरह लगातार बच्चों के गायब होने यह सिलसिला चलता रहा और करीब दर्जनभर बच्चे गायब हो गए थे .
विशेष अदालत के न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने सुनवाई की पिछली तारीख पर कोली को दोषी करार दिया था. इसके बाद कड़ी सुरक्षा के बीच उसे अदालत में पेश किया गया. दोषी को सजा के बारे में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उसे मौत की सजा सुनाई. सजा सुनाए जाने के बाद में कोली के चेहरे पर चिंता की लकीरें और परेशानी साफ नजर आई.
सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक जे पी शर्मा ने बताया कि भारत के इतिहास में अपने आप में यह पहला ऐसा मामला है जिस में किसी मुजरिम को अलग- अलग मामलों में सात बार फांसी की सजा हुई हो, अभी इस कांड से संबंधित नौ मामले लंबित हैं जिनमें फैसला आना है. सात मामलों में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद आज (शुक्रवार, 16 दिसंबर) पहली बार सुरेन्द्र कोली ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि उसकी दलीलों को अदालत ने नहीं सुना. इसीलिए उसने सजा के कागजों पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.

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