Sunday , August 20 2017
Home / Bihar News / नीतियां तैयार करने के लिए देश की समाजिक और आर्थिक जानकारी जरूरी- उप राष्ट्रपति

नीतियां तैयार करने के लिए देश की समाजिक और आर्थिक जानकारी जरूरी- उप राष्ट्रपति

पटना। उपराष्ट्रपति मो हामिद अंसारी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारतीय आंकड़ों की विश्वसनीयता कम हुई है। देश के सामाजिक आंकड़े के क्षेत्र में सब कुछ ठीक नहीं है। नीति के बावजूद हमारे आधिकारिक आंकड़ों के संबंध में समस्याएं बनी हुई हैं।

उन्होंने कहा कि सरकारी आंकड़े और इनके विश्लेषण की खामियों को दूर करने की जरूरत है, क्योंकि बेहतर नीति निर्माण के लिए गुणवत्तापूर्ण आंकड़े जरूरी हैं। वे शुक्रवार को यहां एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट (आद्री) के रजत जयंती समारोह

में ‘सोशल स्टैटिक्स इन इंडिया’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उद‍्घाटन सत्र में उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत जैसे विकासशील देश को अपनी नीतियों को तैयार करने के लिए यहां की आबादी की सामाजिक और आर्थिक जानकारी जुटाने की जरूरत है. लेकिन, आज भी विश्वसनीय और पूर्ण आंकड़ा प्राप्त करना एक चुनौती बना हुआ है। आंकड़ों की गुणवत्ता और उसे एकत्र करने में दोहराव, राष्ट्रीय अभिलेखागार की अनुपलब्धता और आंकड़ा एकत्रित करने के दौरान निजता के अतिक्रमण के संबंध में चिंताजनक स्थिति है।

उन्होंने कहा कि लैंगिक भेदभाव, असमानता, गरीबी और प्रगति जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों को मापने की जब बात आती है, तो सरकारी आंकड़ों की आलोचना सही प्रतीत होती है। उन्होंने फ्रांसीसी अर्थशास्त्री टामस पिकेट्टी का हवाला देते हुए कहा कि आयकर के संबंध में आंकड़ों की कमी और जातिगत आधारित जनगणना के परिणाम जारी करने के प्रति सरकार की अनिच्छा इसके उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि 2012-13 में आयकर के आंकड़े जारी करने के बावजूद यह बात सामने आयी कि उच्च स्तर पर आयकर विवरणी भरनेवालों की संख्या बहुत कम है।

अपने 30 मिनट के संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि जाति आधारित जनगणना से जाति, आय व संपत्ति और आय की समानता के बीच के संबंधों को स्पष्ट करना था। लेकिन, ऐसा नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ विदेश में ही नहीं, बल्कि देश में भी सरकारी आंकड़ों की आलोचना की जा रही है। इसके लिए उन्होंने 2011 में रिजर्व बैंक द्वारा इस संबंध में जतायी गयी चिंता का जिक्र किया।

TOPPOPULARRECENT