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नीतीश कुमार को बिहार का किंग बनाने वाला शख्स

2014 में लोकसभा इंतेखाबात में नरेन्द्र मोदी और भाजपा के लिए हिकमत अमली बनाने वाले प्रशांत किशोर इस बार नीतीश कुमार के लिए लकी चार्म साबित हुए।

37 साल के किशोर इस साल मई में नीतीश से जुड़े थे और उनके लिए हिकमत ए अमली बना रहे थे। किशोर ने नीतीश के बारे में बताया कि, वे जिम्मेदार सियासतदानों में से एक है और बिहार जैसी रियासत में कानून और निज़ाम कायम करने का सेहरा उन्हें मिलना चाहिए। नतीजे आने के बाद किशोर इतवार के रोज़ के नीतीश के बंगले पर दिखाई दिए।

किशोर की टीम में पेशेवर एमबीए और आईआईटी पास आउट लोग हैं। वे एक Trained public health expert हैं और 2011 में उन्होंने अक्वाम मुत्तहदा की नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद वे पीएम मोदी के साथ जुड़ गए और सबसे पहले गुजरात विधानसभा इंतेखाबात में काम किया। इसके बाद गुजश्ता साल लोकसभा इंतेखाबात के लिए हिक्मत अमली बनाये। इस दौरान उन्होंने चाय पे चर्चा जैसे मुहिम चलाए जिनकी मदद से भाजपा इक्तेदार में आने में कामयाब रही। उस वक्त वे गुजरात सीएम हाउस में रहते थे।

बिहार इंतेखाबात से पहले वे भाजपा सदर अमित शाह से भी मिले थे लेकिन शाह को लगा कि बिहार में किशोर की जरूरत नहीं है। बताया जाता है कि भाजपा का भी एक खेमा इस बात से फिक्रमंद था कि कहीं किशोर एक पावर सेंटर बनकर उन्हें बायपास न कर दें। किशोर को पीएमओ में ओहदा देने की तजवीज़ भी दी गयी थी । शाह को अब लग रहा होगा कि उन्होंने कितनी बड़ी गलती कर दी। खबर है कि वे जल्द ही मगरिबी बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से मिलने वाले हैं। बंगाल में आइंदा साल इलेक्शन होगा।

प्रशांत कांग्रेस के नायब सदर राहुल गांधी के लिए अमेठी में काम कर चुके हैं और वहां राहुल का इंत्येखाबी तश्हीर संभाले थे । 2012 में भी वे एक प्लान लेकर कांग्रेस के हेडक्वार्टर गए थे लेकिन सोनिया गांधी और राहुल ने उनमें ज्यादा दिलचश्पी नहीं दिखाई।

आवाम के बीच नीतीश सरकार, बेहतरीन हुक्मरानी , तरक्की और बिहार की ब्रांडिंग की गई। अज़ीम इत्तेहाद की तश्हीर में सिर्फ नीतीश को फेस बनाया गया और उनके इर्द गिर्द ही तश्हीर को रखा गया। डोर टू डोर कैंपेन को तरजीह , चाय पे चर्चा की तर्ज पर नाश्ते पे चर्चा और पर्चे पे चर्चा शुरु की गई।

नीतीश को फोकल में रखकर \’फिर से एक बार हो नीतीशे कुमार हो\’ गाना बनाया और इसे अज़ीम इत्तेहाद का थीम सॉन्ग बनाया गया लफ्ज़ वापसी और डीएनए कैंपेन के पीछे प्रशांत किशोर का ही दिमाग था। नीतीश का लेटर लेकर वॉलंटियर्स को घर घर भेजा गया।

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