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नीतीश के निशाने पर बैंक, कहा- पैसा हमारा, मौज करें दूसरे

वजीरे आला नीतीश कुमार ने बुध को बैंकों को सीधे निशाने पर लिया। कहा- बिहारियों के पैसे से दूसरे रियासतों का तरक़्क़ी हो रहा है। बैंक यहां पैसा जमा कर रहे हैं और लोन बाहर बांट रहे। यह नहीं चलेगा। यही वजह है कि रियासत के सीडी रेशियो में ब

वजीरे आला नीतीश कुमार ने बुध को बैंकों को सीधे निशाने पर लिया। कहा- बिहारियों के पैसे से दूसरे रियासतों का तरक़्क़ी हो रहा है। बैंक यहां पैसा जमा कर रहे हैं और लोन बाहर बांट रहे। यह नहीं चलेगा। यही वजह है कि रियासत के सीडी रेशियो में बढ़ोतरी नहीं हो रही है। रियासत का सीडी रेशियो 44 फीसद है और क़ौमी औसत 78 फीसद। रियासत के बैंकों में 2,11,302 करोड़ रुपए जमा हैं जबकि 79,640 करोड़ का ही लोन बंटा है।

आजादी के इतने साल बाद भी लोग साहूकारों से क़र्ज़ ले रहे हैं। पांच हजार से ज़्यादा पंचायतों में बैंक की शाखाएं ही नहीं हैं। बैंकों को सालाना साख मंसूबा (एसीपी) के दायरे को बढ़ाना होगा। आबादी और महंगाई को देखते एसीपी का दायरा काफी छोटा है। रियासत की तरक़्क़ी शरह दो अंकों में है। इसे बनाए रखने में बैंकों की किरदार बहुत जरूरी है।

रियासत और मरकज़ी हुकूमत मंसूबों के मुतालिक अफराद के एकाउंट में पैसा ट्रांसफर करने की सोच रही है। अगर लोगों का एकाउंट नहीं होगा तो उन्हें कैसे फाइदा मिलेगा। वन मैन बैंक ब्रांच का कंसेप्ट नहीं चलेगा। बैंकों की आमदनी बढ़ी है, आदमी भी बढ़ने चाहिए। बैंकों को अपने कामकाज में ज़्यादा सुधार लाने की जरूरत है।

नीतीश कुमार ने कहा कि रियासत में ज़ीराअत के शोबे में ग्रोथ की इमकान बहुत है। ज़ीराअत तरक़्क़ी के लिए रोडमैप बनाया गया है। मछलीपालन, मुर्गीपालन, ज़ीराअत टेक्नालजी , डेयरी और स्टोर को भी ज़ीराअत रोडमैप में शामिल किया गया है। किसानों की इक़्तेसादी हालत खराब है, ऐसे में बैंक के मदद से भी उनकी हालत सुधर सकती है। तालीम क़र्ज़ अहम है, पर बैंकों ने टार्गेट का 50 फीसद ही हासिल किया है यह फिक्र की बात है।

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