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नीतीश के हलफ़्बर्दारी तकरीब में आडवाणी को दावत देने पर कश्मकश

पटना : भाजपा की नई कियादत की नजर में भले ही लालकृष्ण आडवाणी बेकार हों, लेकिन वजीरे आला नीतीश कुमार आज भी दिल से उनकी इज्ज्त करते हैं। उनके इशारे पर जदयू कियादत 20 नवम्बर को होने वाले हलफ़्बर्दारी तकरीब में आडवाणी को दावत देने पर गौर कर रही है। मुश्किल इस बात को लेकर पैदा हो रही है कि हल्फबरदारी तकरीब महागठबंधन की हुकूमत का हो रहा है। इसमें कांग्रेस और राजद साथी पार्टी हैं। जाहिर है, हलफ़्बर्दारी तकरीब में आडवाणी की मौजूदगी इन दोनों को रास नहीं आएगी। दावत पाकर आडवाणी हलफ़्बर्दारी तकरीब में शामिल हो ही जाएंगे, इसकी भी गारंटी नहीं है।
जदयू के एमपी और क़ौमी तर्जुमान केसी त्यागी ने इतवार को बातचीत के दौरान आडवाणी को दावत देने की इमकानात को पूरी तरह खारिज नहीं किया। उनका कहना था कि शरद यादव हों या नीतीश कुमार-अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी वाली भाजपा से दोनों का बेहतर रिश्ता रहा है। इस इंतिखाब में जीत के बाद भी आडवाणी का रुख पॉज़िटिव था। हलफ़्बर्दारी तकरीब में आडवाणी की मौजूदगी के पॉज़िटिव पैगाम जाएंगे। लेकिन, फिलहाल हम यह नहीं कह सकते कि आडवाणी को दावत दिया जाएगा या नहीं। मालूम हो कि वजीरे आला नीतीश कुमार से भाजपा का अलगाव नरेंद्र मोदी को वजीरे आजम का एलान करने की मंसूबा बनने के दौरान ही हुआ था। यह आडवाणी के फी नीतीश कुमार का इज्ज़त था कि इक्तिदार की परवाह किए बगैर उन्होंने भाजपा से नाता तोड़ लिया।

आडवाणी की इज्जत करने वाले गैर-भाजपाई वजीरे आल में कुमार अकेले नहीं हैं। दिल्ली के वजीरे आला अरविन्द केजरीवाल भी कई मौकों पर आडवाणी के फी इज्ज़त का मुजाहिरा कर चुके हैं।

2015 की तरह 2005 में भी एनडीए ने बिना किसी को सीएम का एलान किए एसेम्बली का इंतिख़ाब लड़ रहा था। जदयू के मौजूदा सदर जार्ज फर्नांडीस इस हक़ में नहीं थे कि नीतीश कुमार का नाम इस ओहदे के लिए तजवीज किया जाए। बात आई तो जार्ज आनाकानी करने लगे। ऐन मौके पर लालकृष्ण आडवाणी ने दरमियान इंतिख़ाब में नीतीश कुमार का नाम का एलान किया।

कांग्रेस और राजद के चलते आडवाणी को बुलाने में दिक्कत हो सकती है। लालू प्रसाद ने वजीरे आला की हैसियत से आडवाणी की रथयात्रा को बिहार में रोका था। उन्हें गिरफ्तार कर मसानजोर में नजरबंद किया था। हालांकि लालू प्रसाद भी कई मौके पर आडवाणी के फी इज्ज़त का मुजाहिरा कर चुके हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस की पूरी सियासत भाजपा के मुखालिफत पर सेंटरलाइज़ है। कहना मुश्किल है कि कांग्रेस सदर सोनिया गांधी हल्फबरदारी तकरीब में लालकृष्ण आडवाणी की मौजूदगी पसंद भी करेंगी।

 

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