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नीतीश को हाइकोर्ट से झटका, ऑडियो-वीडियो से तशहीर पर पाबंदी

पटना : पटना हाइकोर्ट ने ‘बढ़ चला बिहार’ मंसूबा पर हुकूमत को कड़ी फटकार लगायी है। चीफ़ जस्टिस एल नरसिम्हा रेड्डी और जस्टिस अंजना मिश्र की बेंच ने मंगल को जन अधिकार मंच की अवामी मुफाद दरख्वास्त की सुनवाई करते हुए कहा कि इस मंसूबा के तहत सिर्फ अदाद व शुमार जुटाये जा सकते हैं। अदालत ने 400 मंझोले ट्रकों पर लगे ऑडियो- वीडियो के ऑपरेशन पर रोक लगा दी। साथ ही होर्डिग, पोस्टर और फोटो पर तल्ख तनकीद भी की। अदालत ने कहा कि यह पैसे की बरबादी की मंसूबा है।

एडिशनल चीफ़ वकील किशोर ने बताया कि अदालत ने अपने हिदायत में कहा कि ‘बढ़ चला बिहार’ मंसूबा के तहत जितने भी ट्रक तशहीर में घूम रहे हैं, उन पर किसी की तसवीर नहीं होगी। अदालत ने इसके लिए मना किया है। उन्होंने कहा कि अदालत ने इस मंसूबा पर रोक नहीं लगायी है। प्रोग्राम चलेगा और इसमें ऑडियो-वीडियो तशहीर नहीं होगा।

अदालत में मौजूद आईटी महकमा के सेक्रेटरी ने बेंच को बताया कि ‘बढ़ चला बिहार’ मंसूबा आईटी और पीआरडी महकमा की तरफ से चलायी जा रही है। इसमें दो गैरसरकारी अदारों का मदद लिया जा रहा है। इस मंसूबा का हुकूमत से कोई डाइरेक्ट ताल्लुक नहीं है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नौ जून को इस मंसूबा को लांच किया था। इसका मक़सद हुकूमत के नौ साल के तरक़्क़ी के कामों को बताना और अगले 10 सालों के लिए किस तरह की तरक़्क़ी मंसूबा बने, इस पर लोगों की राय जानना बताया गया था। लोगों की राय की बुनियाद पर विजन 2025 तैयार किया जायेगा। काउंसिल इंतिख़ाब में ज़ाब्ता एखलाक कानून की वजह से इसके काम पर रोक लग गयी थी। एसेम्बली इंतिख़ाब अमल पूरी होने के बाद इसका काम फिर शुरू हुआ है।

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