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नीतीश पर सीबीआइ की खामोशी क्यों

चारा घोटाले में काफी सबूत होने के बावजूद सीबीआइ ने वज़ीरे आला नीतीश कुमार, सांसद शिवानंद तिवारी और जदयू के साबिक़ रियसती सदर ललन सिंह के खिलाफ सम्मन जारी नहीं किया और न ही उन्हें आयद ही बनाया। यह इल्ज़ाम सनीचर को भाजपा विधानमंडल के ल

चारा घोटाले में काफी सबूत होने के बावजूद सीबीआइ ने वज़ीरे आला नीतीश कुमार, सांसद शिवानंद तिवारी और जदयू के साबिक़ रियसती सदर ललन सिंह के खिलाफ सम्मन जारी नहीं किया और न ही उन्हें आयद ही बनाया। यह इल्ज़ाम सनीचर को भाजपा विधानमंडल के लीडर सुशील मोदी ने लगाया। उन्होंने तीनों क़ायेदीनों के खिलाफ रांची हाइकोर्ट में दरख्वास्त दायर करनेवालों को सीबीआइ से इत्तिला के अधिकार के तहत मिली जानकारी की बुनियाद पर रिपोर्ट भी जारी की।

उन्होंने कहा कि पशुपालन घोटाले के मुहरीक डॉ श्याम बिहारी सिन्हा के सर्विस तौसीअ के लिए एक खत लिखने पर साबिक़ सीएम डॉ जगन्नाथ मिश्र और डॉ आरके राणा के बयान पर लालू प्रसाद को सजा हो सकती है, तो नीतीश कुमार, ललन सिंह और शिवानंद तिवारी को क्यों नहीं। तीनों क़ायेदीनों के बारे में डॉ श्याम बिहारी सिन्हा, काबीना निगरानी महकमा के सेक्शन अफसर उमेश प्रसाद सिंह और पशुपालन महकमा के इंतेजामी ओहदेदार आरके दास ने दफा 161 और 164 के तहत बयान दिये हैं।

जानकारी देने में लगाये पांच साल : मोदी ने कहा, सीबीआइ ने चारा घोटाला मामले में जनबरदारी नहीं दिखायी। कई बातें छुपा कर रखीं। आरटीआइ के तहत दरख्वास्त गुजारों को जानकारी हासिल करने में पांच साल लग गये। अब भी मुङो उम्मीद नहीं है कि सीबीआइ जदयू के तीनों क़ायेदीनों के मामले में जनबरदारी से काम करेगी। अदालत की सख्ती ही उसे रास्ते पर ला सकती है। सीबीआइ के नाम पर कांग्रेस साथी पार्टियों का शिकार कर रही है।

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