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नीतीश मुतमइन हैं, तो दूसरों की मुझे कोई परवाह नहीं : जीतन राम मांझी

एक, अणे मार्ग। वजीरे आला का सरकारी रिहाइशगाह अहाते। इस विशाल अहाते में एक बांस से घिरे बैठकी में वजीर आला जीतन राम मांझी बैठे हैं, धोती-कुरता और काली बंडी पहने। अपनी हुकूमत को लेकर खबरों में चल रही कयास अराइयों पर थोड़ा भी दबाव नहीं

एक, अणे मार्ग। वजीरे आला का सरकारी रिहाइशगाह अहाते। इस विशाल अहाते में एक बांस से घिरे बैठकी में वजीर आला जीतन राम मांझी बैठे हैं, धोती-कुरता और काली बंडी पहने। अपनी हुकूमत को लेकर खबरों में चल रही कयास अराइयों पर थोड़ा भी दबाव नहीं। आराम, गोई अंदाज़ा और गंवई अंदाज में उन्होंने अपनी हुकूमत की कामयाबियाँ बताना शुरू किया। बात बढ़ी, तो उन्होंने मुस्तकबिल की मंसूबों को भी इश्तराक किया। साथ ही रोजाना मीडिया की सुर्खियां बन रहे अपने बयानों का मतलब भी उन्होंने साफ किया, तो इस पर तबसीरह करनेवालों को आड़े हाथों लिया।

वजीरे आला ने कहा कि उनकी बातों का गलत मतलब निकाला जा रहा है। बोले – हम जिस इमारत में बोलते हैं, उसे दूसरे एंगल से परोसा जा रहा है। मांझी ने नीतीश कुमार के साथ अपने रिश्तों को लेकर साफ-साफ बात की। उन्होंने बातचीत में कहा, मेरे ऊपर नीतीश कुमार के बहुत एहसान हैं।

जब उन्होंने वजीरे आला ओहदे छोड़ने का फैसला लिया, तो उनके सामने कई लोग थे। उनकी ज़ात के भी लीडर थे और दूसरी जातियों के भी, जिन्हें वह वजीरे आला के ओहदे सौंप सकते थे। लेकिन, उन्होंने मेरे ऊपर भरोसा किया। इसलिए मैं उनका क़र्ज़दार हूं। वह जिस दिन हमसे कुरसी छोड़ने के लिए कहेंगे, मैं सोचूंगा। वजीरे आला मिस्टर मांझी अपनी पार्टी के उन लीडरों की परवाह नहीं करते हैं, जो उनके बयानों को लेकर खफा हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा, नीतीश कुमार अभी मौन हैं और इसका मायने हम यह समझते हैं उन्हें मेरे काम, मेरी बातों से कोई परेशानी नहीं है।

जब वह मुतमइन हैं, तो दूसरों की मुङो परवाह नहीं। उन्होंने जदयू के एमपी और क़ौमी जेनरल सेक्रेटरी केसी त्यागी का नाम लेकर कहा कि उनके जैसे लीडरों की हैसियत नहीं मुङो धमकी देने की। पार्टी के अंदर मुखालिफत की उठ रही आवाजों पर जब वजीरे आला से सवाल हुआ, तो उनका कहना था- ‘कल्ट’ है। जो आवाज उठा रहे हैं, वे कौन लोग हैं, देख लीजिए। सब एक ही क़िस्म के लोग हैं। उनके सियासी वजूद का है। उनलोगों को लग रहा कि दलित, आदिवासी और इंतेहाई पसमानदा एक हो जायेंगे, तो उनकी सियासत ही खत्म हो जायेगी। लेकिन, मैं ऐसे लोगों से डरता नहीं। उन्हें जो कहना है, कहते रहें, मुङो जो कहना है, मैं कहता और करता रहूंगा।

वजीरे आला ने अपने तमाम बयानों को लेकर सफाई दी। उनका कहना था – 70 साल की उम्र में कभी शराब नहीं पिया। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के लोगों को मेरी बात समझ में आ रही है। सागर विवि के वाइस चांसलर और स्वामी अग्निवेश जैसे लोग चीजों को समझ रहे हैं। लेकिन, कुछ ऐसे अनासिर हैं, जिन्हें नागवार लग रहा है। ऐसे अनासिर तमाम दलों में हैं, जदयू में भी और भाजपा में भी। वजीरे आला के मुताबिक अगले एक साल उनका जोर गांव-गांव तक बिजली पहुंचाना, बिहार में सरमायाकारी और कमजोर तबकों की फ्लाह व बोहबुद मंसूबों को लागू कराने पर होगा। वह मानते हैं कि बिजली में बेहतरी हुकूमत की सबसे बड़ी कामयाबी रही है। वह इस इल्ज़ाम को गलत बताते हैं कि रियासत में कानून निजाम की हालात खराब हुई है।

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