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नीतीश राज में फ़रियादियों के लिए ‘जहांगीरी घंटी’

जिस ‘जहांगीरी घंटी’ ने वीर राय में इंसाफ की उम्मीद जगाई है, उसकी पहल दरभंगा ज़ोन के पुलिस आईजी अरविंद पांडेय ने की है।

जिस ‘जहांगीरी घंटी’ ने वीर राय में इंसाफ की उम्मीद जगाई है, उसकी पहल दरभंगा ज़ोन के पुलिस आईजी अरविंद पांडेय ने की है।
यौमे जम्हूरिया के मौक़े पर अपने रिहाइशगाह में यह ‘घंटा’ लगाकर उन्होंने इसकी शुरुआत की। यह ‘घंटी’ असल में एक आम कॉल बेल ही है, जिसके ऊपर ‘जहांगीरी घंटी’ लिखा है और साथ ही घंटी की एक बड़ी सी तस्वीर चिपकाई गई है। इस घंटी को बजाकर कोई भी सख्स किसी भी व़क्त अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। घंटी का नाम ‘जहांगीरी घंटी’ रखने की वजह आईजी अरविंद पांडेय यह बताते हैं कि वो मुग़ल बादशाह जहांगीर से मुतासीर रहे हैं, जिन्होंने आवाम की शिकायतें सुनने के लिए अपने महल के बाहर एक बड़ा सा लोहे का घंटा लगाया था।

अरविंद पांडेय ने दरभंगा ज़ोन के दस ज़िलों के तमाम पुलिस अफसरों को यह हिदायत दिया गया है कि वो चौबीस घंटे आम आवाम की शिकायत सुनने के लिए अपने सरकारी रिहाइशगाह पर ऐसी एक घंटी लगाएं।

उन्होंने बताया कि शिकायत दर्ज करने के लिए पुलिस सुप्रीटेंडेंट और दूसरे अफसरों के दफ्तरों में वफद अफसर भी मुकर्रर किए जाएंगे। यह घंटा इंस्पेक्टर से लेकर आईजी सतह तक के तमाम अफसरों के रिहाइशगाह पर लगाया जाएगा।

शिकायत हुई दर्ज

कैसे काम करती है यह घंटी? इस बारे में वीर राय ने बताया कि 28 जनवरी की दोपहर आईजी रिहाइशगाह पर घंटी बजाने से पहले वो थोड़ा डर रहे थे, लेकिन फिर आस-पास मौजूद लोगों ने हौसला बढ़ाया और उन्होंने घंटी का स्विच दबा दिया।

घंटी बजाने के कुछ देर बाद एक सिपाही उन्हें अंदर ले गया। वहां उनका दरख्वास्त देखा गया और शिकायत सुनी गई। फिर उनकी शिकायत को रजिस्टर में दर्ज भी किया गया। इसके बाद उन्हें आईजी से मिलाया गया। आईजी से उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी शिकायत को दस दिनों के अंदर दूर कर दिया जाएगा।
खैर नतीजा चाहें जो हो, लेकिन दरभंगा आईजी की यह पहल फ़िलहाल मीडिया में बहस का मौजू बना हुआ है।

बशुक्रिया : बीबीसी हिन्दी

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