Tuesday , October 24 2017
Home / India / नीलगिरी की पहाड़ियों का एक अनोखा डाकिया

नीलगिरी की पहाड़ियों का एक अनोखा डाकिया

डी सिवान हर रोज़ नीलगिरी के आसपास के मुश्किल पहाड़ी इलाको मे 15 किमी की यात्रा करते हैं इस डाकिया का कई बार जंगली हाथियों ने पीछा किया है । जब वे डाक बांटने  के लिए सिंगर और मरपल्लम की आस पास की फिसलन भरी बस्तियों से गुज़रते हैंउनकी भालू और सांप से हर रोज़ मुठभेड़ होती है।

वह ज्यादातर, नीलगिरि माउंटेन रेलवे ट्रैक के साथ साथ चलते हैं । उनकी यात्रा कुनूर के पास एक पहाड़ पर बने डाकघर से शुरू होती है और वे चलते चलते कई रेलवे पुल पार करते हैं, उबड खाबड़ ज़मीन  पर चलते हुए वे डाक और पेंशन लेकर बागान श्रमिको के पास जाते हैं जो बुरिलीयर, सिंगर एस्टेट के पास के जंगलों में रहते हैं।

जब ‘द हिंदु’ के  रिपोर्टर ने 62 साल के डी सिवान से बात की तो उन्होंने कहा की वे रोज़ 15  किमी की यात्रा के दौरान कई सुरंगों को पार करते हैं । उन्होंने कहा की उन्हें अब इतना अनुभव हो गया है की वे यह जानते हैं की उन्हें कहाँ जानवर  मिलेंगे ओर वे उन हिस्सो पर सतर्क हो जाते हैं । उन्होंने कहा की पिछले 6  सालो में बंटने वाली डाक  की संख्या मे कमी हुई है क्योंकि लोग कुनूर या मेट्टूपलयम में जा कर बस गए हैं ।
उन्होंने कहा औसतन, वे एक सप्ताह मे 3 डाक  बुरिलीयर और माराप्पालाम के आस पास की बस्तियों मे बांटते  हैं जो तीन साल पहले हर हफ्ते प्रत्येक बस्ती के लिए 10-15  होता था । एस सगथएवं , कुन्नूर में बड़ूगां थोट्टम के निवासी हैं जहाँ सड़क मार्ग से जाना दुर्गम है, उन्होंने कहा कि श्री सिवान मेट्टूपलयम और कुन्नूर स्थापित निवासियों को भी डाक बांटने  जाते हैं । वे याद करते हैं कि एक आदमी जिसे वे पेंशन वितरित करते थे, वह कोयम्बटूर मे स्थानांतरित हो गया था और गंभीर रूप से बीमार होने के कारण उन्हें पैसो की जरूरत थी। श्री सिवान ने उस व्यकित को ढूंढा, जो तब अस्पताल में भर्ती था और अपनी जेब से पैसा खर्च कर वे वहां उसको उसकी पेंशन देकर आये । श्री सिवान ने कहा कि वह अपनी नौकरी, जिसके लिए उन्हें 12000  रुपये प्रति माह मिलते हैं केवल लोगो की सेवा के लिए कर रहे हैं ।

उन्होंने कहा।”मेरे तीन साल सेवानिवृत्ति के लिए बचे हैं । मुझे लोगो की सेवा में आनंद मिलता है और जब तक मे सेवा निवृत नहीं होता यह काम करता रहूँगा “।

TOPPOPULARRECENT