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नेक आमाल के ज़रीया दुनिया के इम्तेहान की तैयारी की तलक़ीन

जनाब मुहम्मद नईम उद्दीन ख़ादिम इस्लाह मुआशरा-ओ-अज़ाला मुनकिरात के इजतिमा मुनाक़िदा मस्जिद अर्फ़ात अहमद पूरा कॉलोनी निज़ामाबाद से मुख़ातिब किया कि तलबा ओ नौजवानों अपने हाई स्कूल‍ ओ‍ कालेज्स के सालाना इम्तेहानात से गुज़र रहे हैं इम्ते

जनाब मुहम्मद नईम उद्दीन ख़ादिम इस्लाह मुआशरा-ओ-अज़ाला मुनकिरात के इजतिमा मुनाक़िदा मस्जिद अर्फ़ात अहमद पूरा कॉलोनी निज़ामाबाद से मुख़ातिब किया कि तलबा ओ नौजवानों अपने हाई स्कूल‍ ओ‍ कालेज्स के सालाना इम्तेहानात से गुज़र रहे हैं इम्तेहानात की फ़राग़त के बाद दुनिया के इम्तेहान की तैयारी में लग जाएं ।

जिसका नतीजा आख़िरत में निकलने वाला है । फ़रमाया ताजदार मदीना हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स्०अ०व्०) कि मैदान हश्र से किसी आदमी के क़दम हट नहीं सकते जब तक कि पाँच सवालात के जवाबात ना दिए जाएं ।

(1) उम्र कैसे गुज़ारी । (2) जवानी कहां खपाई । (3) माल कहां से कमाया । (4) माल कहां ख़र्च किया । (5) जितना इल्म मिला था इस पर कितना अमल किया । लेकिन इस इम्तेहान के दाख़िला की शर्त अमन लाना है और नेक आमाल के ज़रीया दुनिया के इम्तेहान गाह में तैयारी करना है ।

तलबा ओ नौजवान इससे वाक़िफ़ हों। चूँकि ये हमारे वारिसैन और जानशीन हैं । इनकी तालीम और अमली तरबियत अख़लाक़-ओ-आदाब ज़िंदगी की तर्बियत , माँ बाप की ख़िदमत , उस्ताद का अदब , बुरी और शैतानी आदतों से बचना , गाली और सेल फ़ोन का कसरत से इस्तेमाल , टी वी खेल तमाशों में ज़िंदगी गुज़ारना , इसी चीज़ों से बचना और बचाना है ।

जिसके ज़रीया से इस्लामी मुआशरा तामीर होगा । वर्ना ये तबक़ा हमारे लिए मुस्तक़बिल में वबाल जान बन जाएगा । हमा मसह लक्की तंज़ीम इस्लाह मुआशरा-ओ-अज़ाला मुनकिरात ने तलबा-ए-ओ- नौजवानों के लिए अख़लाक़ी चार्ट्स , आदाब ज़िंदगी के चार्ट्स , बुराईयों से बचने बचाने के लिए इशकाल के ज़रीया समझाए हैं । जिसको अपनी तालीम-ओ-तरबियत में रखे । ये इस्लामी तहज़ीब और मुस्लमान होने की शनाख़्त है ।

वज़ू और नमाज़ों की अमली तरबियत , क़ुरआन हकीम की तालीम और क़मरी महीने हिज्री कैलेंडर की वक़्फीत तैयार किया गया है । जो मुफ़्त तक़सीम है इसको हासिल करें और अपनी करीब की मस्जिद के इमाम उल्मा ए इकराम‍ ओ हाफिज़ ए इकराम की ख़िदमात हासिल करें।

यह तंज़ीम इस्लाह मुआशरा-ओ-अज़ाला मुनकिरात से रब्त पैदा करें । वालदैन की ज़िम्मेदारी है कि बच्चों को सही तर्बियत की तरफ़ लगाएं ताकि मुआशरा सालेह और नेक बने और आला तालीम की तरफ़ रवां दवां हो जाए । दुआ पर इजतिमा ख़तम हुआ । तलबा ‍व नौजवानों की कसीर तादाद मौजूद थी ।

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