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नोटंबदी: पुराने नोट बंद होने का परिणाम, दिल्ली के बाजारों में पसरा है सन्नाटा

नई दिल्ली:  भाजपा सरकार द्वार देश भर में 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों का चलन बंद हुए शुक्रवार से बंद कर दिया गया है जिसका बुरा परिणामबाजारों में देखने को मिल रहा है। बाज़ारों में विरानी अब भी जारी है। खरीदारों के आने का इंतेज़ार कभी ना खत्म होने वाला इंतेज़ार साबित हो रहा है। खासकर उन बाज़ारों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है, जहां लोग कैश से खरीदारी करने आते हैं।

मौसम बदला तो दुकानदारों ने सर्दी के लिए गर्म कपड़े पहले ही मंगवा लिए थे. अब मांग नहीं है तो उन्हें बड़ा नुकसान होने की आशंका सताने लगी है। बात अगर लाजपत नगर मार्केट की करें, तो वहां कारोबार बीस से तीस फीसद ही रह गया है। बड़े शोरूम में तो कार्ड से कुछ कारोबार हो भी रहा है, लेकिन पटरी पर दुकान लगा कर अपनी जिंदगी चलाने वाले अब सड़क पर हैं. कारोबार में इस नरमी की वजह से कई व्यापारियों ने अपने स्टाफ कम करने पर भी सोचना शुरू कर दिया है। ऐसे में बेरोजगारी कि मार अलग से पड़ने की आशंका है।

दिल्ली के ही सरोजनी नगर मार्केट को देखें, तो वहां हाल और भी बुरा है। शादी का सीज़न होने के बावजूद बाजार खाली है. इस मार्केट में करीब पांच सौ से ज्यादा कारोबारी हैं, लेकिन सब खाली बैठे हैं. धंधा दस से बीस फीसद ही रह गया है। व्यापारियों के मुताबिक, उन्होंने रोज़ दस से बीस हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। ये व्यापारी नोटबंदी के फैसले के तो साथ हैं, लेकिन ये जरूर कह रहे हैं कि इसे बेहतर तरीके से लागू किया जाना चाहिए था।
अगर कैशलेस व्यापार कि बात करें, तो इसमें वक्त लगेगा. सीपी में कारोबार करने वाले भी ऐसे ही हालत से गुजर रहे हैं. धंधा करीब पचास फीसद तक गिर गया है। खुदरा बाजार से लेकर थोक बाजार तक सभी कारोबार के पटरी पर लौटने का इंतेजार कर रहे है। जहां पहले पैर रखने कि जगह नहीं होती थी, वहां अब कुछ ही लोग नज़र आ रहे हैं। अब उम्मीद इस बात पर टिकी है कि जैसे-जैसे नए नोट लोगों के पास पहुचेगा तो वो बाजार का रुख करेंगे।

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